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युवा बेटी की मित्र बने

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
29th Nov, 2021

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मैं एक विवाह समारोह में बीना दीदी की युवा बेटी से मिली ।मैं कुछ पूछती इससे पहले ही बीना दीदी बोली शिल्पा से मिलो, मेरी बेटी बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स कर रही है । फिर शिल्पा ने जिस शिष्टाचार और शालीनता से मेरा अभिवादन किया वह मुक्षे अन्दर तक छू गया ।न जाने क्यों मैं शिल्पा के उज्जवल भविष्य के सपने बुनने लगी । वास्तव में युवा होती लड़कियों के साथ इस प्रकार का विश्वास और आत्मिय व्यवहार एक ऐसी मनोवैज्ञानिक जरूरत है,जो उम्र के इस नाजुक मोड़ पर लड़कियां अनुभव करती है । यदि परिवार की महिलाएं युवा होती लड़कियों का विश्वास और आत्मिय भरा व्यवहार देती है,तो लड़कियां स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है । इसलिए युवा बेटियों का साथ दे और उनकी मित्र बने ।उनसे बराबर बात चीत करें और उनकी जिज्ञासाओं और अपेक्षाओं को जाने ।आपका स्नेह और विश्वास मिलने पर लड़कियां सामाजिक वर्जनाओं और शिष्टाचार को समक्षेगी और अनेक भ्रामक स्थितियों से बचेंगीइस अवस्था में कमी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। शारीरिक परिवर्तनों को स्वीकार करना तो उनकी विवशता है पर मानसिक परिवतनो के लिए उन्हें एक मित्र की आवश्यकता होती है । ऐसे में मां ही आत्मिक व्यवहार और व्यवहारिक जीवन की सत्यता बता सकतीं हैं ।आपका ये व्यवहार उनके अंदर एक विश्वास जगायेगा।इन परिवर्तनों के लिए वह स्वयं को मानसिक तौर पर स्वीकार कर सकेंगी।ऐसे युवको और पड़ोसियों के संपर्क में बिल्कुल न‌आने दे,जो दूसरों की कमजोरियों का लाभ उठाते है । अपनी युवा बेटी को
मैं एक विवाह समारोह में बीना दीदी की युवा बेटी से मिली ।मैं कुछ पूछती इससे पहले ही बीना दीदी बोली शिल्पा से मिलो, मेरी बेटी बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स कर रही है । फिर शिल्पा ने जिस शिष्टाचार और शालीनता से मेरा अभिवादन किया वह मुक्षे अन्दर तक छू गया ।न जाने क्यों मैं शिल्पा के उज्जवल भविष्य के सपने बुनने लगी । वास्तव में युवा होती लड़कियों के साथ इस प्रकार का विश्वास और आत्मिय व्यवहार एक ऐसी मनोवैज्ञानिक जरूरत है,जो उम्र के इस नाजुक मोड़ पर लड़कियां अनुभव करती है । यदि परिवार की महिलाएं युवा होती लड़कियों का विश्वास और आत्मिय भरा व्यवहार देती है,तो लड़कियां स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है । इसलिए युवा बेटियों का साथ दे और उनकी मित्र बने ।उनसे बराबर बात चीत करें और उनकी जिज्ञासाओं और अपेक्षाओं को जाने ।आपका स्नेह और विश्वास मिलने पर लड़कियां सामाजिक वर्जनाओं और शिष्टाचार को समक्षेगी और अनेक भ्रामक स्थितियों से बचेंगी।इस अवस्था में कमी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। शारीरिक परिवर्तनों को स्वीकार करना तो उनकी विवशता है पर मानसिक परिवतनो के लिए उन्हें एक मित्र की आवश्यकता होती है । ऐसे में मां ही आत्मिक व्यवहार और व्यवहारिक जीवन की सत्यता बता सकतीं हैं ।आपका ये व्यवहार उनके अंदर एक विश्वास जगायेगा।इन परिवर्तनों के लिए वह स्वयं को मानसिक तौर पर स्वीकार कर सकेंगी।ऐसे युवको और पड़ोसियों के संपर्क में बिल्कुल न‌आने दे,जो दूसरों की कमजोरियों का लाभ उठाते है । अपनी युवा बेटी को न
इस अवस्था में कमी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। शारीरिक परिवर्तनों को स्वीकार करना तो उनकी विवशता है पर मानसिक परिवतनो के लिए उन्हें एक मित्र की आवश्यकता होती है । ऐसे में मां ही आत्मिक व्यवहार और व्यवहारिक जीवन की सत्यता बता सकतीं हैं ।आपका ये व्यवहार उनके अंदर एक विश्वास जगायेगा।इन परिवर्तनों के लिए वह स्वयं को मानसिक तौर पर स्वीकार कर सकेंगी।ऐसे युवको और पड़ोसियों के संपर्क में बिल्कुल न‌आने दे,जो दूसरों की कमजोरियों का लाभ उठाते है । अपनी युवा बेटी को नइस अवस्था में कमी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। शारीरिक परिवर्तनों को स्वीकार करना तो उनकी विवशता है पर मानसिक परिवतनो के लिए उन्हें एक मित्र की आवश्यकता होती है । ऐसे में मां ही आत्मिक व्यवहार और व्यवहारिक जीवन की सत्यता बता सकतीं हैं ।आपका ये व्यवहार उनके अंदर एक विश्वास जगायेगा।इन परिवर्तनों के लिए वह स्वयं को मानसिक तौर पर स्वीकार कर सकेंगी।ऐसे युवको और पड़ोसियों के संपर्क में बिल्कुल न‌आने दे,जो दूसरों की कमजोरियों का लाभ उठाते है । अपनी युवा बेटी को विश्वास में लेकर उन्हें जीवन की कठोर सच्चाइयों से परिचित कराये।इस उम्र में स्नेह और सहानुभूति की ऊष्मा ही कमजोर बना देती है ।वे क्षूठ को भी सत्य मान लेती है । अपनी बेटी को इस मगत्रष्णा से बचाये। अविवाहित लड़कियों का विवाहिता पुरूषों में ज्यादा रुचि लेना, ज्यादा साथ बिताना इन सबकी ज्यादा छूट न दे ।सब कुछ जान कर भी अंजान न बने । यदि आप समक्षती है कि भ्रम वंश आपकी बेटी बहक गई है तो उसे प्रताणित न करें। सही क्या है और ग़लत क्या है, एक मित्र की तरह उसे समीक्षाएं। अपने व्यवहारिक अनुभवों के आधार पर अपनी गुमराह बेटी का सहारा बने ।उसे सोचने और समझने के पर्याप्त समय दे । यदि आपने उसे गुस्से में बेकाबू होकर अनाप-शनाप बोल दिया,तो वह और अधिक डर जायेगी। ऐसे में वह गलत रास्ता चुन सकती है। युवा बेटियों को खुली सोच का व्यापक आधार दे। प्यार भरा संरक्षण दे ताकि वे गुमराह होने से बच सके ।

मंजू ओमर
क्षांसी

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