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रसायन में उत्कृष्ट योगदान के लिए दो महिलाओं को मिला नोबेल पुरस्कार

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Sanjana Nayar
30th Nov, 2021

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देश में जहां बेटियों- महिलाओं की अस्मिता खतरे में है. वैसे में विदेश से इस खबर का आना कि दो महिलाओं को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया, अपने आप भी सुकून भरा है. नोबेल पुरस्कार समिति ने साल 2020 केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार इमैनुएल कारपेंटियर और जेनिफर ए डूडना को देने की घोषणा की है. उन्हें यह खिताब ‘जीनोम एडिटिंग’ का तरीका विकसित करने के दिया जाएगा.


दोनों विज्ञानियों ने अहम टूल 'सीआरआइएसपीआर-सीएएस9' को विकसित कर ये उपलब्धि अपने नाम की है. इसे जेनेटिक सीजर्स नाम दिया गया है. इमैनुएल और जेनिफर द्वारा विकसित की गई तकनीक का उपयोग कर शोधकर्ता जानवरों, पौधों और सूक्ष्म जीवों के डीएनए में अत्यधिक उच्च शुद्धता के साथ बदलाव कर पाएंगे. यह तकनीक कैंसर के इलाज में योगदान देगी. साथ ही इसके माध्यम से जेनेटिक बीमारियों को ठीक करने का सपना भी सच हो सकता है. इस खोज को विज्ञान और मेडिकल जगत के लिए महान तोहफा बताया जा रहा है.

हर साल समाज के लिए उत्कृष्ट और अद्वितीय कार्य करने वाले व्यक्ति या संस्था को नोबेल प्राइज दिया जाता है. यह सम्मान खासकर उनलोगों को मिलता है जो विज्ञान, मेडिसिन, अर्थव्यवस्था, साहित्य, शांति, भौतिकी से जुड़े होते हैं. नोबेल पुरस्कार वितरण की शुरुआत सन् 1901 में स्वीडन के महान इंजीनियर, रसायनशास्त्री और डाइनामाइट विस्फोटक की खोज करने वाले अल्फ्रेड नोबेल की याद में की गई.

बताया जाता है कि अल्फ्रेड अपने डाइनामाइट की खोज से खुश नहीं थे. उन्हें इस बात की हूक थी कि सकारात्मक उद्देश्यों से किया गया उनका आविष्कार युद्ध में भारी तबाही मचा सकता है. इसी पश्चाताप के कारण उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा कि उनके मरने के बाद उनकी संपत्ति नोबले फाउंडेशन को दान कर दी जाए और हर साल उस संपत्ति से समाज के लिए अद्वितीय कार्य करने वालों को यह पुरस्कार दिया जाए. यह परंपरा आज तक चली आ रही है.

हर नोबेल पुरस्कार विजेता का चयन एक अलग समिति करती है. रॉयल स्वीडिश अकैडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी, केमिस्ट्री और अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेताओं का चयन करती है. जबकि कैरोलिन इंस्टीट्यूट, स्टॉकहोम, स्वीडन में नोबेल असेंबली मेडिसिन के क्षेत्र में विजेताओं के नाम की घोषणा करती है. साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार स्वीडिश अकादमी स्टॉकहोम की ओऱ से दिया जाता है और शांति का नोबेल पुरस्कार नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति प्रदान करती है. नोबेल पुरस्कार जीतने वाले को प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ 23 कैरेट सोने से बना 200 ग्राम का पदक और लगभग 4.5 करोड़ रुपये की इनाम राशि दी जाती है. हालांकि, जब इसकी शुरुआत हुई थी तो इनाम राशि 5 लाख रुपये हुआ करती थी.

नोबेल पदक में एक ओर इस पुरस्कार के जनक अल्फ्रेड नोबेल की तस्वीर, उनका जन्म और मृत्यु की तारीख अंकित होती है जबकि दूसरी ओर यूनानी देवी आइसिस का चित्र, रॉयल अकैडमी ऑफ साइंस स्टॉकहोम और पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति की जानकारी लिखी होती है. साल 1901 से लेकर 2018 तक 52 बार महिलाओं को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है. जिसमें मदर टेरेसा, मैडम क्यूरी और मलाला यूसुफजई जैसी कई हस्तियां शामिल हैं. 119 सालों में अब तक मात्र 10 भारतीयों ने इस सम्मान को अपने नाम किया है.

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