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मन की बात

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
6th Oct, 2020

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आज के समय में जब दादा दादी या नाना-नानी अपना घर परिवार छोड़ कर बच्चों के पास जाते हैं तो उन्हें सबकुछ बड़ा बदला सा नजर आता है । माहौल जीवन शैली दिन चर्या खाना नाश्ता सब कुछ अपने समय और उम्र से अलग । लेकिन बच्चों का सानिध्य और पोते पोतियों का साथ उन्हें बदलने के लिए प्रेरित करता है ।नये युग के दादा दादी और नाना नानी जिंदगी के इस पड़ाव को काफी कुछ उत्साह से जी रहे हैं । उन्होंने पूराने दकियानूसी विचारों को छोड़ कर नया परिवेश अपना लिया है । काफी कुछ बदलाव लाते हैं अपने अन्दर। बच्चों को भी लगता है कि अब मम्मी पापा के आने से हमारे बच्चे सुरक्षित हो गये है । उन्हें किसी आया की जरूरत नहीं है । कोई ग़लत आदतें नहीं सीख रहे हैं । इतना ही इतमिनान काफी है । लेकिन इसके साथ एक बात ये भी है कि बच्चों को मां बाप की मौजूदगी रास आ रही है नहीं तो आजकल के बच्चे अपने पेरेंट्स के साथ रहना नहीं चाहते ।यह बुजुर्गों का बड़प्पन यह है कि उन्होंने उम्र की ढलान पर नयी संस्कृति को अपना लिया है । आपसी समक्षदारी से खुशहाल है सबकी जिंदगी, न ज्यादा दखलंदाजी,न बहस,बस प्यार और आत्मविश्वास ।। खुशहाल जिंदगी के लिए और क्या चाहिए । जरूरत बस दोनों ओर से साथ कदम बढ़ाने की जिससे खुशियां भी साथ चल सकें ।यह तो सब जानते है कि दादा दादी नाना नानी का प्यार निस्वार्थ होता है साथ ही सुरक्षात्मक भी । इसके लिए दोनों ओर से प्रयत्न होने चाहिए । बच्चों का माता-पिता के प्रति सम्मान और बुजुर्गों को आपस में सामंजस्य बनाते हुए प्यार और स्नेह से रह सकते हैं । अगर यह मंत्र हरेक परिवार अपना रेतो यह सुखद बयार सबको संतुष्ट कर देगी ।

मंजू ओमर
क्षांसी

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