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वो पल खामोशी सा

नित्यश्री
नित्यश्री
5th Oct, 2020

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आज कुच महीनो बाद उसके गली से गुजरणा था
ये बात का ख्याल पहले ही आ गया था
सांसे तेज चलनी लगी
औंर मन मैं खुशी औंर उदासी मचलं हो रही थी
जैसे उस्से मिलने जाती थी वैसे लग रहा था
शहर जाना अंजाना था पर उसकी गली से पैचान जरूर थी
उसको मेरा जैसे सजणा था सवरना था आखो मैं हलकी बै चैनी
होठो पे मुस्कान औंर सफर मैं मोबाईल साईड लिये बीती बाते याद करना
कुच अक्षो बाद ही थोडी देर के लिये मोबाईल देखणा
कित्ना सफर करना हैं !!
सबकुच वै से ही था बस मेरी मंजिल वो नहीं था
मेरे मीलने की खुशी वो नाही था
गम साया ,शहर पौचने के बाद उसे मिलना
उसकी खमोशी औंर उस्को देखणा भी नहीं था !!
सोचा था साल निकल गया
उसकी यादो ने दूरिया ले हूवी होगी
पर उसके शहर जाकर तो यही मेहसुस हुवा
आज भी सबकुच वैसा ही है
जा पर दो लोग दूर हो गये यादे बाते पल मुस्कान रोना
Everything is same nothing changed.
Just only people tied a scarf on their face before they won't but I wear before also मन मैं वही वेहम उसके गली से कोई मुझे पैचान ना जाये !!

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