Bluepad दिल में सफलता की धधकती ज्वाला
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दिल में सफलता की धधकती ज्वाला

Ankit Gupta
Ankit Gupta
3rd Oct, 2020

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( यहां एक व्यक्ति जो गरीब परिवार में जन्म लेता है तथा उसने अपने जीवन में बड़े नजदीक से गरीब देखें हर पहलुओं को देखा है वह अपने दिल पर सफलता की ज्वाला को देख रहा है सफलता की ओर जाते हुए उसे कई लोग विचलित करना चाहते हैं परंतु वह है सफलता की ओर अग्रसर होता है/)
एक व्यक्ति गरीब परिवार में जन्म लेता है वह जन्म से ही गरीब इति के हर पहलू को बड़े नजदीकी से देखता है वह जिस तरह बड़ा होता जाता है वह सफलता होने के लिए उसके दिल में एक ज्वाला प्रज्वलित होती है ज्वाला प्रचलित होती है जिससे वह सफल बनाना चाहता है वह हर कठिनाइयों को पार करके सफलता की ओर अग्रसर होता है-
" बिन कठिनाइयों से घबराए, डरे उन मंजू रो रास्तों पर चलता रहा, साहस के बल पर बिन घबराए डरे चलता रहा उन रास्तों पर आत्म विश्वास है की आशा लिएलिए"
वह कठिनाइयों से लड़कर अपने जीवन को सफल बनाने के लिए सफलता के लिए हर मंजिलों को पार करता रहा तथा किसी के बातों पर ना विचलित हुए वह उन रास्तों पर आत्मा विश्वास है आशा लिए चलता रहा क्योंकि वह उस समय से गुजरा हुआ था उसने वह समय देखा हुआ था यहां पर केवल कांटे ही कांटे थे लेकिन मेहनत करके वह उन कांटो रूपी रास्तों को पार करता रहा तथा सफलता के लिए बढ़ता रहा ना मैं थक रहा था ना मेरे कदम रख रहे थे बस केवल एक ही आंखों में सपना बसा हुआ था वह सफलता-
सफलता के मार्ग पर चल रहे कदम ऐसे जैसे शिकार को देखकर शेरों के कदम ना रुके/
" आप में विश्वास की आस लिए बढ़ता रहा उन मंजिलों पर, ना रुक रहे थे एक कदम मेरे ना थक रहा था बदन मेरा/
सफलता के मार्ग पर जब चल रहा था मैं सफलता की पास पहुंच रहा था तो लोगों ने मुझे सफलता के मार्ग से विचलित करने का बहुत प्रयास किया लेकिन मैं सफलता की और इतना अग्रसर था कि मुझे सिर्फ सफलता ही नजर आ रही थी मेरे रग रग में यूं लग चुका था सफलता के रंग पर कि मुझे और कोई रंग चढ़े ही नहीं रहा था मुझे उनकी बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा और मैं सफलता की ओर अग्रसर होने लगा-
" जब आया समय जिंदगी में सफलता के पताका लहराने का, तब लोगों ने सफलता के मार्ग से विचलित करने का कोई अवसर ना गमाया/ मैं सफलता के मार्ग से खो जाऊं विचलित वह मेरी टांग खींचते रहे"/
" दिल में था बसा सफलता का जुनून मेरे, सफलता के रंग में रंगा था हर अंग मेरा, उस समय उनकी बातों का प्रभाव ना पड़ा मुझ पर"/
जब मैं अपने जीवन में सफलता पाने का इंतजार था और कड़ी मेहनत कर रहा था जीवन में सफल होने का लोग मेरी टांग खींचते जा रहे थे और मुझे सफलता की ओर अग्रसर होने में और आनंद मिल रहा था मैं किसी की बात सुने उनके बाद का प्रभाव मुझ पर पड़े मैं आगे बढ़ रहा था और अपनी सफलता का पताका लहराने के लिए तैयार था
" जब चल रहा था सफलता राहों पर में, खींच रहे थे लोग टांग मेरी असफलता की ओर ले जाकर/ रहा तदस्थ उस समय में जैसे अंगद का पैर जमा रहा कर लिए सारे प्रयास लोगों ने हो गए परास्त सारे धुरंधर ना पैर अंगद का पैर हिला पाया"
मेरे रग रग में सफलता का यूं रंग रंग चुका हुआ था कि मैं उसी समय सफलता के लिए तथास्तु था कि लोग मुझे अपनी सफलता की राह पर चलने से विचलित करने का बहुत प्रसन्न करने लगे लेकिन मैं जिस तरह अंगद ने लंका में जाकर अपने पैरों को जमीन पर जमा दिया सारे धुरंधरों ने उसके पैर को हटाने की बहुत कोशिश की लेकिन सारे परास्त हो गए लेकिन उसका पैर किसी ने नहीं हिला पाया उसी तरह मैं भी जीवन में सफलता के लिए तथा एकदम प्रथा तथा में जब मुझे सफलता प्राप्त हुई और मैं सफलता के लिए आगे बढ़ता रहा जो लोग मेरी टांग खींच रहे थे वह आज मेरी सम्मान के लिए खड़े हो रहे हैं और मुझे सम्मान दे रहे हैं-
" जब मैं पहुंचा सफलता की उन ऊंचाइयों में, ऐसा उमड़ रहा था दिल में खुशी का फुहारा फिर सफलता रूपी वस्त्र मैंने यूं ही धारण किए यूं ही इत्र लगाया वस्त्रों पर उस सफलता रूपी इत्र की सुगंध शायरी चारों दिशाओं पर, फिर आकर्षित हुए लोग मेरी ओर जो खींच रहे थे टांग मेरी आज मेरे सम्मान में खड़े दिख रहे"
मैं अपनी सफलता पाकर बहुत खुश था तथा उसे सफलता की कड़ी मेहनत पर मुझे जो दर्द हुए ठोकरें खाई दर्द मिला उन सब से निराश ना होकर मैं केवल सफलता की ओर बढ़ता रहा और मुझे जो लोग मेरी टांग खींचते थे मेरी खिल्ली करते थे मेरा मजाक उड़ाते थे आज वह मेरी सम्मान के लिए खड़े हो रहे हैं और जो दर्द मुझे मिले थे उसकी मुझे सफलता रूपी दवा मिल गई औषधि मिल गई जिससे मेरे बदन में जो दर्द था वह सब जख्म भर चुके थे सफलता की ओर इतना रंग में रंग चुका था तक केवल केवल मुझे सफलता ही दिखाई दे रहे थे और अपनी गरीबी को मैंने सफलता की राह पर चलकर ही सफलता को पाकर मैंने अपनी गरीबी को ही मिटा दी-
" जब लकी सफलता की वह औषधि जिंदगी के सारे रोग मिट गए/

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