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करुणा और प्रेम की प्रतिमूर्ति थे स्व.अमरसिंह

Krishna Mohan Jha
Krishna Mohan Jha
29th Nov, 2021

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद पं. विष्णुदत्त शर्मा के पूज्य पिताश्री पं अमर सिंह शर्मा का गत दिवस मुरैना के सुरजनपुर गांव में 93 वर्ष की आयु में देहावसान हो गया | आज सुरजनपुर मेंं दिवंगत आत्मा का त्रयोदशी संस्कार आयोजित किया गया है |यूं तो स्व. शर्मा के निधन के बाद बारह दिन बीत चुके हैं परंतु सुरजनपुर गांव के लोगों की आंखें अभी भी नम हैं| उनकी नम आंखों के सामने अभी भी स्व. अमरसिंह जी का वह ममतामयी चेहरा झूल रहा है जिस पर सभी के लिए हमेशा प्रेम ,करुणा और फिक्रमंदी के भाव होते थे | जब भी वे गांव के किसी नागरिक से मिलते तो उसकी एवं उसके परिवारजनों की कुशलक्षेम पूछना उनके स्वभाव में शामिल था |उनके लिए पूरा गांव उनका परिवार था | किसी भी परिवार में कोई समस्या हो तो उसका समाधान तत्काल करने के लिए वे व्याकुल हो जाते थे और जब तक वे उसका समाधान नहीं कर देते उन्हें चैन नहीं आता था |उनका सहज ,सरल धीर ,गंभीर ,गरिमामय व्यक्तित्व उस विशाल वट वृक्ष की शीतल छाया का अहसास कराता था जिसमें बैठकर हर किसी को अनिर्वचनीय सुकून की अनुभूति होती थी |
स्व. श्री शर्मा मूलत: किसान थे लेकिन अन्नदाता का भाव उनके अंदर कभी नहीं जागा| उनके लिए तो कृषि एक पवित्र व्यवसाय थी जिसमें भारी भरकम मुनाफा कमाने का विचार कभी नहीं आया |दरअसल खेती को वे सेवा का माध्यम मानते थे | वे धरती पर एक फरिश्ते के रूप में आए थे जिसके लिए दूसरों की पीडा दूर करना ही सच्चा धर्म था | 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' में उनका दृढ विश्वास था |एक सच्चे निस्पृही समाजसेवी का निष्कलंक जीवन जीने के बाद 93 वर्ष की आयु में जब उन्होंने अंतिम सांस ली तो उनके ऊपर 'जस की तस धर दीन्हीं चदरिया'कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती थी | जिन लोगों को एक बार भी स्व.पं. अमर सिंह जी का सान्निध्य पाने का सौभाग्य मिला वे हमेशा के लिए उनके होकर रह गए | सादा जीवन उच्च विचार की वे जीती जागती मिसाल थे | अहंकार और आडंबर को उन्होंने अपने जीवन में कभी प्रवेश नहीं करने दिया |

स्व. पं.अमर सिंह जी ने अपना संपूर्ण जीवन एक कृषक के रूप में व्यतीत करते हुए अपनी सुयोग्य संतानों को उच्च शिक्षा और उत्तम संस्कार प्रदान करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी | उनकी संतानों पर शैशवावस्था से ही 'होनहार बिरवान के होत चीकने पात 'कहावत चरितार्थ होने लगी थी|
अपने सभी पुत्र -पुत्रियों को सुशिक्षित और सुसंस्कृत बनाकर उन्हें देशभक्ति और समाजसेवा के मार्ग चलने की जो प्रेरणा और प्रोत्साहन उन्होंने दिया उसी का सुफल है कि सभी अपने सदकार्यों से समाज में अपने पूज्य पिताश्री का नाम रोशन कर रहे हैं| प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और लोकप्रिय सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा बताते हैं कि जब उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण किया तब उनके पिताजी ने उनसे वचन ले लिया था कि राजनीति उनके लिए समाज सेवा और राष्ट्रभक्ति का एक माध्यम मात्र होगी | श्री शर्मा विश्व के सबसे बडे राजनीतिक दल होने का गौरव अर्जित कर चुकी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी अपने स्व. पिताजी को दिए गए उस वचन को भूले नहीं हैं | सबके प्रति अपनत्व की भावना ,वाणी की मधुरता और परदुखकातर स्वभाव और व्यक्तित्व में समाया सम्मोहन उन्हें अपने स्व. पूज्य पिताश्री से विरासत में मिला है | उल्लेखनीय है कि श्री विष्णुदत्त शर्मा अपने महाविद्यालयीन जीवन में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड गए थे जिसमें अपनी विशिष्ट पहिचान बनाने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगा | विद्यार्थी परिषद में दीर्घकाल तक महत्वपूर्ण पदों की
जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के पश्चात् संघ के प्रचारक के पद पर भी सफलता पूर्वक कार्य किया | उनकी कर्मठता, समर्पण और मौलिक सूझबूझ से प्रभावित होकर केंद्र सरकार ने उन्हें नेहरू युवा केंद्र के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी और वहां वे अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए | गत लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय उम्मीदवार के रूप में विजयी होने के बाद उन्हें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई | राज्य की भा ज पा सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय की विशिष्ट अहमियत होती है | श्री शर्मा हमेशा ही यह कहते हैं कि उन्होंने जीवन में जो कुछ भी अर्जित किया है उसके पीछे स्व.पिताजी का शुभाशीष , मार्गदर्शनऔर उत्तम संस्कार हैं ,ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमेशा उनके बताए सदमार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करे |

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