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कोरोना में प्रकृति सुधार

ठाकुर योगेन्द्र सिंह
ठाकुर योगेन्द्र सिंह
1st Oct, 2020

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स्वरचित कविता


प्रतिबंधों से लाभ मिला ये,
धरती अम्बर शुद्ध हो गए।
जंतु विचरते मुक्त, प्रदूषण मार्ग
सभी अवरुद्ध हो गए।।
रात चांदनी होती है अब,
अम्बर में तारे दिखते हैं।
नदियां, झीलें, ताल, सरोवर,
स्वच्छ स्रोत सारे दिखते हैं।।

जालंधर से छटा हिमालय की,
अब लोग निहार रहे हैं।
सीतामढ़ी, सहारनपुर से भी,
लख हिम के द्वार रहे हैं।।
यातायात, मशीन, प्रदूषण,
रुका, धरा ने राहत पाई।
धरती का कम्पन कम है तो,
भूकंपों की गति हलकाई।।

अब ओजोन परत के घटने,
का भी बेड़ा पार हुआ है।
उत्सर्जित कम हुए रसायन,
इससे बहुत सुधार हुआ है।।
पराबैगनी किरणे अब,
धरती तक नहीं पहुंच पाएंगी।
वर्षा होगी अधिक, कैंसर
से भी हमे बचा पाएंगी।।

घटा प्रदूषण, स्वच्छ हवा में,
सांस ले रहे हैं सब प्राणी।
रोग, व्याधि कम हुए, किन्तु,
कोरोना की चलती मनमानी।।
नहीं वक्त मिलता था जिनको,
किसी तरह वो काट रहे हैं।
वॉट्सएप और फेसबुक के
जरिए ही खुशियां बांट रहे है।।

शुरू हुई उस दिन से अब तक,
निश दिन दूरी नाप रहीं थी।
थमी हुई हैं रेल, कार, बस,
जिनसे धरती कांप रही थी।।
जो है जहां, वहीं पर रहकर,
एक एक दिन काट रहा है।
कालचक्र ऐसा घूमा है,
परिवारों को बांट रहा है।।

अब भी संभले तो कुदरत का,
कर्जा हम उतार सकते हैं।
सामूहिक वृक्षारोपण से,
जंगल फिर उभार सकते हैं।।
पूर्ण नियंत्रित हुआ प्रदूषण,
तो जग, जंतु विहार बनेगा।
मानव का सपना सच होगा,
व्यधिमुक्त संसार बनेगा।।



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ठाकुर योगेन्द्र सिंह
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ठाकुर योगेन्द्र सिंह

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