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चीनी जीवास्त्र

ठाकुर योगेन्द्र सिंह
ठाकुर योगेन्द्र सिंह
1st Oct, 2020

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स्वरचित कविता


एक चीन ने दुनियां भर में,
कैसा ये बवाल कर डाला।
एक वाइरस ऐसा छोड़ा,
लटका भूमंडल पर ताला।।
समझ न पाया कोई जग में,
दुष्ट निशाचर का मंसूबा।
खुद को तो बर्बाद किया ही,
सारी दुनियां को लेे डूबा।।

महाशक्ति होकर भी उसको,
दुनियां का सुख चैन न भाया।
चमगादड़ खाने वालों ने,
चमगादड़ को अस्त्र बनाया।।
वेट मार्केट को वुहान की,
दोष दिया, सबको भरमाया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन सरीखे,
उत्तरदाई को खूब छकाया।।

अब रहस्य की परतें,
धीरे धीरे करके उतर रहीं हैं।
लेकिन सच्चाई को फिर भी,
चीनी चोंचें कुतर रहीं हैं।।
सारा विश्व जानता है अब,
कोरोना वुहान से आया।
स्वयं चीन ने शोध क्रिया से,
विकसित करके इसे बनाया।।

विश्व शक्तियों को धमकाने,
का उन्माद शीर्ष चढ़ बोला।
म्लेच्छ अधखुली आंखों ने,
तब कोरोना का पिंजरा खोला।।
पहले खुद के हाथ जलाए,
फिर दुनियां में आग लगाई।
लाखों जीवन लील चुका है,
अब तक ये किल्विश का भाई।।

अब सहानुभूति का नाटक,
बेशर्मी से खेल रहा है।
घटिया मास्क, वेंटिलेटर किट,
मंहगे दामों में पेल रहा है।।
ऐसी दुखद त्रासदी में भी,
ये यमराज कफ़न भरता है।
शक्तिमान का अंश मिटाने,
ज्यों तमराज जतन करता है।।

उत्तेजित, आक्रोशित,
दुनियां भर के नेता खीज़ रहे हैं।
बेबस और लाचार, क्रोध में,
सभी हथेली मींज रहे हैं।।
जिस दिन वैक्सीन दुनियां को,
कोरोना की मिल जाएगी।
फिर औकात चीन को,
मिलकर सारी दुनियां दिखलाएगी।।



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ठाकुर योगेन्द्र सिंह
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ठाकुर योगेन्द्र सिंह

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