Bluepadहम कब सुधरेंगे?
Bluepad

हम कब सुधरेंगे?

Archana Mehra Mehta
Archana Mehra Mehta
15th May, 2020

Share

अनुभव 2019

आज ऑटो में बैठ कर जा रही थी बहुत खुश थी कि चलो 3 लोग हैं आराम से पहुँच जाऊँगी घर किन्तु एक एक स्टॉप आता गया और 3 का 5 हो गया। भाई 4 तो ठीक था पर ये 5😂 फिर एक दददू आए और अपना बोरा लेकर वो भी नीचे ही ऑटो में बैठ गए। बिटिया बस ज़रा सा, ज़रा सा ज़रा सा करते करते मुझे लग रहा था मैं कैसे पहुँच पाऊँगी घर? एक झटके में लगता अब गिरी, बगल में बैठी हुई मोहतरमा के साथ 4 बच्चे 1 बोरे पर बैठ गया, दूजा मम्मी की गोदी में तीसरा अपने बापू के पास, चौथे को थोड़ी जगह मिली तो वो वहीं कोने में खिड़की के पास खड़ा हो गया, स्पीड ब्रेकर आता तो बेचारा गिरने को हो जाता।

ये क्या हो रहा है? हम क्यूँ इतना एडजस्ट करते हैं? क्यूँ 3 वाली सीट पर 5 लोग? ऐसा विचार करते घर आ गया, रात को सारे काम समेट कर जब टीवी लगाया तो देखा की टीवी पर ट्रैफिक नियम के बारे में कहा जा रहा है, जो ट्रैफिक के नियम बनाए गए हैं उनका उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। कल से ऑटो में पिछली सीट पर 3 और आगे की सीट पर बस एक ही व्यक्ति बैठेगा, यदि नियम का उल्लंघन करता कोई भी नज़र आया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मन खुशी और उल्लास से भर गया, वाह अब आएगा मज़ा.. लेकिन ये क्या सुबह उठ के जब तैयार होके निकली तो हालात वही थे, 3 की सीट में 5 गुस्से से मैंने जब ऑटो वाले को बोला क्यूँ भैया क्या बात है ट्रैफिक नियमों का पालन नही करना क्या?
पान पीकते हुए ऑटो वाला बोला अरे मैडम कैसा नियम कौन सा नियम यहाँ रोज़ नियम बनते है सुनता कौन है? तभी आगे ट्रैफिक पुलिस वाले को देख मुझे लगा अब तो इसकी वाट लगेगी, ट्रैफिक वाले ने डंडा मारकर ऑटो रोका और बोला क्यूँ बे कैसे ये इतनी सवारी क्यूँ भरी है तेरे को पता नहीं है? चल इधर तेरी पर्ची काटता हूँ। ये कहकर वो ऑटो वाले को ले गया उसके बाद ऑटो वाला आया और सवारी लेकर चल दिया मुझे लगा कुछ लोग अब उतर जाएंगे पर ये क्या आवाज़ आई ओ मैडम जी थोड़ा साइड हो जाइये सवारी को एडजस्ट कर लीजिये। क्यूँ मैं नहीं एडजस्ट करूँगी अनायास ही मुझे गुस्सा आ गया, मैं चिल्लाई एक तो इतनी ज़ोर से गाने चला रखे हैं पहले इसे बन्द करो, अब तो जैसे ऑटो वाले के दिल पर ही जा लगी ऑटो रोक कर बोला मैडम जी आप यहीं उतर जाइये मुझे और सवारी मिल जाएगी गाना बन्द नहीं होगा। बीच रास्ते में मैं भी गुस्से में उतर गई। लेकिन फिर उसके बाद मुझे कड़ी धूप में 1 किलो मीटर चलना पड़ा तब जाकर ऑटो मिला वो भी ठसाठस भरा हुआ। मरती क्या न करती हलक प्यास के मारे सूख रहा था मैं झट से चढ़ गई और फिर बोली "भैया थोड़ा साइड दीजिये न एडजस्ट कीजिये"
अपनी ही पंक्तियाँ मेरे कानों में गूँज रही थीं...
आखिर क्यूँ? ये कैसी बवाल व्यवस्था है।
कब हम खुद सुधरेंगे?

©अर्चना मुकेश मेहता

27 

Share


Archana Mehra Mehta
Written by
Archana Mehra Mehta

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad