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आईना

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
22nd Sep, 2020

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कहते हैं आईना‌ .....सच बयान करता है ,
पर आईने की हकीकत को, कहा‌ं कोई समझ पाया है ,
जब भी देखा दांया , तो बांया नजर आया है ,
पर इसका ये छल ,कहां हमें नजर आया है ।

आइना.... सिर्फ चेहरे के दाग दिखाता है ,
लिबास के पीछे छुपे दागों को, ये कहां दिखा पाता है ,
दिल के दर्द को भी ये ,बयान नहीं कर पाता है ,
घायल मन के जख्मों को , ये छू भी नहीं पाता है ।

कभी कभी ये आईना ,अजब खेल दिखाता है ,
जो यादों में साथ होता है,
उस शख्स का ....अक्स दिखाता है ,
ये आईना वफ़ा... भी कहां निभाता है ,
जो शख्स सामने हो ,उसी का हो जाता है

आईना ...सिर्फ शीशे के नही हुआ करते ,
सच्चे इंसान की आंखें भी ,आईना होती हैं ,
शख्शियत उस इंसान की, इन आंखों से बयान होती है,
एक अजीब भी ताकत.... होती है आईने में,
अनायास वो भी दिख जाता है ,जो नजर नही आता है।

कभी कभी ये आईना ... मुझसे यूं कहता है,
टूटे हुआ तो तू है.... फिर भी मुझमें पूरा क्यूं दिखता है ?

खुद आईना बनकर .... आईने को समझना चाहती हूं,
ये नजर का धोखा है.....या दिल की सच्चाई है।

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