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तु मेरी मौसिक़ी...

Pradipkumar Sackheray
Pradipkumar Sackheray
20th Sep, 2020

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तु मेरी मौसिकी तु ही मेरी धुन
दिल कोयल कुँहके तु भी सुन
मैं तुझको चाहुँ
बस यही गाऊँ
ये गुनगुनाऊँ
सुहाना समा युँ तो कभी ना हुआँ
दिवाने दिल को लगी बस दुआँ
बेचैन नज़रों को कुछ तो हुआँ
तु ही मेरा मर्ज़ और तु ही दवा
तु ही ज़िंदगी तु ही धड़कन
शायद इसे ही कहते हैं प्यार
तीर न जाये कही दिल के पार
दिल को तो अब न आये करार
सदा मिलन को रहें बेकरार
तु मेरी आशिक़ी तु मेरा ज़ुनून
लबों पे बसी तु बनके ग़ज़ल
लिख़ रहा हूँ मैं तुझे आज़कल
दिल साहिल पे रहें हर पल
कैसे ना जाता ये दिल भी फ़िसल?
तु मेरी शायरी तु कलम का ख़ुन

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