Bluepad‘स्वर कोकिला’ की दीवानी दुनिया
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‘स्वर कोकिला’ की दीवानी दुनिया

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Gayatri Baghel
15th May, 2020

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भारतरत्न लता मंगेशकर सबसे प्रतिष्ठित पाश्र्व गायिका। वो किसी परिचय की मोहताज नहीं है। लता की आवाज की दीवानी भारत हीं नहीं पूरी दुनिया है। उनकी आवाज को लेकर अमेरिका के वैज्ञानिकों ने भी कह दिया कि इतनी सुरीली आवाज न कभी थी और न कभी होगी। पिछले 6 दशकों से भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज दे रहीं लता मंगेशकर बेहद ही शांत स्वभाव और प्रतिभा की धनी हैं। लता मंगेशकर को स्वर कोकिला, स्वर साम्राज्ञी कहा जाता है। लता ने हिंदी, मराठी और बंगाली सहित 36 से अधिक भाषाओं में गीत गा चुकी हैं जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में हुआ था। इनके पिता पंडित दीनदयाल मंगेशकर और माता शेवंती थी। लता के बचपन का नाम ‘हेमा’ था। मगर जन्म के 5 साला बाद माता-पिता ने ‘लता’ नाम रख दिया था। लता अपने सभी भाई-बहनों में बड़ी हैं। मीना, आशा, उषा तथा हृदयनाथ उनसे छोटे भाई बहन हैं। इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक भी थे इसलिए संगीत इन्हें विरासत में मिली।

लता को बचपन से ही गीत-संगीत और कला की ओर आकर्षण था। पांच वर्ष की उम्र से ही लता को उनके पिता संगीत का पाठ पढ़ाने लगे। उनके पिता के नाटकों में लता अभिनय भी करने लगीं। लता की अनबन अपने स्कूल के टीचर से हो गई। इसके बाद वह कभी स्कूल नहीं गई। अभिनय में दिलचस्पी नहीं रहने के बावजूद लता ने छोटी उम्र में फिल्मों अभिनय किया।
मात्र 13 वर्ष की उम्र में हीं लता के पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की सारी जिम्मेवारी लता पर आ गई। जिम्मेवारियों को निभाने के लिए लता को फिल्मों में अभिनय करना पड़ा। हालांकि लता की दिलचस्पी अभिनय में नहीं बल्कि गीत संगीत में थी। नवयुग चित्रपट फिल्म कंपनी के मालिक और इनके पिता के दोस्त मास्टर विनायक (विनायक दामोदर कर्नाटकी) ने इनके परिवार को संभाला और लता मंगेशकर को एक सिंगर और अभिनेत्री बनाने में मदद की।

लता मंगेशकर ने अपने संगीत सफर की शुरुआत मराठी फिल्मों से की। इन्होंने मराठी फिल्म ‘किटि हासल’ (1942) के लिए एक गाना गाया था लेकिन अंत समय में इस गाने को फिल्म से निकाल दिया गया। 1945 में लता मंगेशकर मुंबई शिफ्ट हो गईं। वहां पर उन्होंने भिंडीबाजार घराना के उस्ताद अमन अली खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया। मुंबई में लता गुलाम हैदर जैसे संगीतकारों के सम्पर्क में लता आईं और उनका करियर निखरने लगा। गुलाम हैदर ने लता से श्मजबूरश् (1948) में एक गीत श्दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोड़ाश् गवाया। यह गीत लता का पहला हिट माना जा सकता है।

लता के अनुसार गुलाम हैदर उनके सही मायनों में गॉडफादर थे और उन्हें लता की प्रतिभा में पूरा विश्वास था।परिवार की जिम्मेवारियों को निभाने के कारण लता ने कभी शादी का ध्यान नहीं किया। हालांकि संगीतकार सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं। लता ने कितने गाने गाए इसका ध्यान लता को भी नहीं है क्योंकि इसका उनहोंने रिकार्ड नहीं रखा।  अदांजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने 5 से 7 हजार गानों में अपनी आवाज दी होगी।

अगर बात पुरस्कारों की करें तो लता ने जितने पुरस्कार उन्होंने लिए उससे अधिक उन्होंने मना कर दिया। 1970 के बाद उन्होंने फिल्मफेअर को कह दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नहीं लेंगी और उनकी बजाय नए गायकों को यह दिया जाना चाहिए।
लता को 1969 में पद्म भूषण, 1989 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, 1999 में पद्म विभूषण, 2001 में भारत रत्न दिया गया। 1972 में फिल्म ‘परी’, 1974 में  ‘कोरा कागज’,1990 में ‘लेकिन’ के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पाश्र्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया। लता को 1959 ‘आजा रे परदेसी’ (मधुमती), 1963 ‘काहे दीप जले कही दिल’ (बीस साल बाद), 1966 ‘तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा’ (खानदान), 1970 ‘आप मुझसे अच्छे लगने लगे’(जीने की राह से) के लिए फिल्म फेयर अवार्ड दिया गया। 1993में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 1994 में ‘दीदी तेरा देवर दीवाना‘ (हम आपके हैं कौन) के लिए विशेष पुरस्कार दिया गया। 2004 में फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड  दिया गया।

लता को महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार दिया गया। 1966, 1977 में सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायिका, 1997 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, 2001 में महाराष्ट्र रत्न दिया गया। बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की ओर से 1964 में वो कौन थी, 1967 में मिलन, 1968 में राजा और रंक, 1969 सरस्वतीचंद्र, 1970 दो रास्ते, 1971 तेरे मेरे सपने, 1972 पाकीजा,1973 बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म), 1973 अभिमान, 1975 कोरा कागज, 1981 एक दूजे के लिए, 1985 राम तेरी गंगा मैली, 1987 अमरसंगी (बंगाली फिल्म),1991 ‘लेकिन’ के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार दिया गया। इनके अलावा कई और पुरस्कार, सम्मान और ट्रॉफियां लता मंगेशकर को मिली है। मध्यप्रदेश सरकार ने लता मंगेशकर के नाम पर पुरस्कार भी स्थापित किया है।

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