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ठाकुर योगेन्द्र सिंह
ठाकुर योगेन्द्र सिंह
14th Sep, 2020

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स्वरचित कविता

हमने सहना सीख लिया है !

सारे घाव छुपाकर दिल में,
सारे दर्द बसाकर दिल में ,
दुनियादारी की महफ़िल में,
हंसते रहना सीख लिया है ।
हमने सहना सीख लिया है।।

संबंधों की हद से पीछे,
फर्जों की आंधी के नीचे,
सांझ सवेरे आंखे मींचे,
चलते रहना सीख लिया है।
हमने सहना सीख लिया है।।

हमे नहीं कोई भी गम है,
जिंदा हैं ये ही क्या कम है,
ऐसी बातों में क्या दम है,
फिर भी कहना सीख लिया है।
हमने सहना सीख लिया है।।
हमने सहना सीख लिया है।।

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ठाकुर योगेन्द्र सिंह
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ठाकुर योगेन्द्र सिंह

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