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मुझे दुनियादारी नहीं आती....

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
13th Sep, 2020

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इस फरेबी दुनिया की, मुझे दुनियादारी नहीं आती ,
झूठ को सच साबित करने की, मुझे अदाकारी नहीं आती ,
"मैं" सिर्फ "मैं" मे सिमटा रहूँ, मुझे वो कलाकारी नहीं आती ,
शायद इसलिए "मैं" पीछे हूँ ,क्योंकि मुझे आज के लोगों सी होशियारी नहीं आती ।

बेशक लोग न समझें ,मेरे नादान ,पाक ,साफ दिल को ,
लेकिन माफ करना मेरे दोस्तों ,मुझे हुनर ए दगाबाजी नहीं आती ।

लोगों को शायद सच की बोली पसंद नहीं आती ,
लेकिन हमसे झूठ की शब्दावली कही नहीं जाती ,
कभी सोचते हैं ...लोग भी शायद सच ही कहते हैं ,
इस जमाने की भीड़ मे ,तभी हम तन्हा से रहते हैं,
सब सही हैं ,सबको फिक्र हमारी है ,
लेकिन क्या करें दोस्तों, ये कमबख्त दिल मानता कहाँ है....
झूठी शोहरत पाने की.....इजाजत देता कहाँ है.....
आज की दुनियादारी के मुताबिक़ ये चलता कहाँ है ,
हमने इस नादान दिल को बहुत समझाया है ,
लेकिन ये सख्त दिल ...खुद के लिए पिघल नही पाया है ।

दिल ने कहा...जब यूँ ही आधी जिदंगी गुजार दी ,
फिर अब तू क्यूँ बदलाव चाहता है......?
जमाने की इस भीड़ मे गुम हो जाना चाहता है....।

दिल ने कहा.....इंतजार कर थोड़ा वो वक्त भी आयेगा ,
जब तू पूरी तरह इस दुनिया के रंग मे रंग जायेगा ,
शायद फिर किसी खास को याद भी ना आयेगा ।

दोस्तो ...कोशिश करते रहेंगे, शायद हम बदल जाएं,
लेकिन बदल गये हम तो बहुत कुछ बदल जाएगा ,
इस जमाने का ये दोगला ,रंग हम पर भी चढ़ जाएगा ,

फिर ना कहना दोस्तो...कि तुम पहले ही ज्यादा अच्छे थे,
दिल मे कोई फरेब नही ,इंसान बहुत सच्चे थे ,
दुनिया की इस भीड़ मे ,तुम लगे कुछ अपने से थे ,
शब्द...भले तुम्हारे कम लेकिन ..जज्बात.. बहुत अच्छे थे ।

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