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मेरी खुशी मेरा ग़म

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
6th Sep, 2020

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इस बेगानी दुनिया का ,हर दस्तूर हमें निभाना है ,
अमावस की हो रात,पर पूनम का चांद बताना है ,
दिल का हर राज़....हमे छुपाना है ,
आंखों में हो नमी, पर होंठों पर मुस्कान दिखाना है।

भरी महफ़िल मे भी तन्हा थे ,
ये कैसी महफ़िल का हम हिस्सा थे ,
होंठों पर थी हर पल मुस्कान ,
पर दिल मे थे ...ग़म अपार ,
ये कैसा भ्रम है जीवन मे ,
क्या मेरी खुशी ही मेरा ग़म है ....

जीवन मे फैले हैं उजियारे ,
पर हमें लगे ...क्यूं ये अंधियारे ,
कहीं दूर से आती आवाजें ,
पर हमें लगे ...क्यूं ये चीत्कारें ,
ये मन का भ्रम क्यों जीवन मे ,
क्या मेरी खुशी ही मेरा ग़म है....

सफलता की ऊंची उड़ान भरी जीवन में ,
तारीफों के कई तमगे पाए हमने ,
सपनों का घरोंदा भी बनाया हमने ,
पर ये मन अकेला ही पाया हमने ,
कुछ दिलासा देने आए अपने ,अपना बनकर ,
न जाने क्यूं...हम कर ना पाए विश्वास उनपर,
कुछ पराए भी आए , अपने बनकर ,
पर कर ना सके हम , एतबार उनपर ,
जब साथ नहीं अपना ही साया ,
तब हर अपना भी लगे हमें पराया ,
जो मिली खुशी हमें ...वो क्षणिक थी ,
पर अगले ही पल वो भी काफुर थी ।

शायद....मन में कोई भ्रम ... अब ना समाया था ,
ग़म और खुशी का ... अब साथ साथ साया था ,
जैसे खुशी में ...आंख भर आई थी ,
वैसे ही ग़म की खुशी ... भी अब समझ आयी थी ।

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