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बेनाम रिश्ता

Bhawna Nagaria
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2nd Sep, 2020

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कुछ रिश्ते जिंदगी में ..... अनायास जुड़ जाते हैं ,
ना जाने कैसे...कब.... वो बेहद खास बन जाते हैं ,
ऐसा ही बेनाम रिश्ता ....रब ने हमें नबाजा था ,
जाने क्यूं ....उस शख्स से बेहद लगाव हमने पाया था ,
रिश्ता ये स्वीकारने में ...मन थोड़ा हिचकिचाया था ,
सोचा था इस रिश्ते को ... सींचते नहीं हैं ,
पर बिना खाद पानी के ही... हमने अंकुरित इसे पाया था,
और जड़ों को इसकी ... बेहद मजबूत पाया था ।

इस रिश्ते को आज तक ... नाम नहीं दे पाया है ,
जज्बातों से जुड़े इस रिश्ते को , खुद के बेहद करीब पाया है
भीगा भीगा से ये रिश्ता , हौले से मुझे सहला जाता है ,
दर्द और खामोशी को मेरी ,सहज ही समझ जाता है ,
इस रिश्ते की गहराई को, शायद कोई नहीं समझ पायेगा ,
कोई पूछेगा ... ये कौन है ....?
तो शायद ...ये दिल भी ना बता पाएगा ।


ना कोई मेल ना मुलाकात ,
फिर भी जाने क्यूं है एक दूसरे की आदत ,
इस रिश्ते के एवज में ... ना हे .. कोई चाहत ,
एक दूसरे की खुशी के लिए ...बस करते हैं इबादत ।

शायद क्षितिज के उस पार ...ही मुलाकात होगी ,
बहुत कुछ है...अनकहा... वो सब बातें होंगी ।

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