Bluepadमास्क ही है आपका चेहरा
Bluepad

मास्क ही है आपका चेहरा

Saurabh Zemse
Saurabh Zemse
31st Aug, 2020

Share

“क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे,

नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छिपी रहे”

यह गीत १९९१ में आए “इज्जत” फिल्म का है लेकिन आज इसके शब्द सच हो रहे है। नकली चेहरों के बारे में बात करते करते कब हमने अपने असली चेहरे मास्क के पीछे छिपा लिए पता भी नहीं चला। और यह सब एक सूक्ष्म विषाणु कोरोना से बचने के लिए। लेकिन यही आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। इसीलिए इस विषाणु से निपटने वाली वैक्सिन का सबको बेसबरी से इंतज़ार है। लेकिन क्या वाकई में यह वैक्सिन हमारे जीवन को पटरी पर ला सकेगी?

सभी लोग यही आशा कर रहे हैं की वैक्सिन आने के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। मास्क उतर जाएंगे, हमारे ढके मुंह खुल जाएंगे। पहले की तरह हम “नॉर्मल” जीवन जी सकेंगे। घूम फिर सकेंगे, भटक सकेंगे, अपनों से मिल सकेंगे।

जरा रुकिए... साँस लीजिए। वैक्सिन कोई जादू की छड़ी नहीं है की सब कुछ ठीक हो जाएगा। सबसे पहले तो अपने मुंह से मास्क निकल जाएगा इस खुशफहमी में मत रहिए। यह सब हम आपको डराने के लिए नहीं बल्कि आपको चेतावनी देने के लिए कह रहे है ताकि आप किसी असमंजस में ना रहें। इसकी वजहे जानना भी जरूरी है।

इस वैक्सिन के बारे में पहले जान लेते हैं। इस वक़्त तक पूरे विश्व के २१६ देशों में १,६५,२३,८१५ कोरोनाबाधित मरीज हैं जिसमें से ६,५५,११२ लोग अपनी जान गवां चुके हैं। एक तरफ कोरोना से बचने के लिए लॉकडाऊन जैसे उपाय किए जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक अनुसंधान संशोधन संस्थानों में कोरोना विषाणु को निष्प्रभ करने के लिए वैक्सिन तैयार करने में जुटे हैं। अब तक १५५ वैक्सिन कैंडिडैट उनके क्लीनिकल ट्रायल के अलग अलग पायदानों पर पहुंचे है। इसमें से २६ वैक्सिन कैंडिडैट की टेस्ट इन्सानों पर हो रही है। ५ वैक्सिन कैंडिडैट टेस्ट के तीसरे मतलब आखिरी पायदान पर पहुंची है। उनके परिणाम और सुरक्षितता की जांच करने के लिए अलग अलग उम्र के लोगों पर उनके प्रयोग किए जा रहे हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने किया हुआ ट्रायल सफलता पूर्वक पूरा होने से इस क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना है और लोगों के दिलों में आशा जग गई है।

यह वैक्सिन हमें उपलब्ध हो जाने के बाद भी हमने यह ध्यान में रखना जरूरी है कि यह टेस्ट हजारों लोगों पर हुआ है जो की प्रातिनिधिक है। इस वैक्सिन का किस व्यक्ति पर कैसा असर करेगा यह पहले ही सुनिश्चित करना मुश्किल है। इसलिए वैक्सिन लगने के बाद आप १०० प्रतिशत सुरक्षित हो गए है ऐसा मानना ज्यादती होगी। हमें हर हाल में एहतियात बरतनी ही होगी। क्यूंकि वैक्सिन बनाने वाले भी बता रहे हैं कि इस वैक्सिन से ६० से ७० प्रतिशत ही आपको संरक्षण मिल सकता है। इसका मतलब यह है की ३० से ४० प्रतिशत खयाल रखने की जिम्मेदादी हमारी ही होगी।


ह्यूस्टन के बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन की वैक्सिन संशोधक मरिया एलेना बोटाझी कहती हैं, “वैक्सिन मिलने का मतलब यह नहीं कि आप अपना मास्क कूड़े में फेंक दें। यह कोई जादू की छड़ी नहीं है की उसके मिल जाने से सब कुछ बदल कर पहले जैसे हो जाएगा।“ इसका मतलब है कि फिलहाल कोरोना को बेअसर करने के लिए यह वैक्सिन आएगी लेकिन इस पर बड़े पैमाने पर अनुसंधान चलता रहेगा। और उसके अंतिम छोर पर पहुँचने के लिए वक़्त लगेगा। क्यूंकि हमें हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आज के इस नए नवेले विषाणु का बंदोबस्त करना है।

आने वाला वैक्सिन इस महामारी से हमे कुछ हद तक राहत देगा। अपनों से मिलने का, त्योहार और उत्सव मनाने का, यहाँ तक कि अंतिम संस्कार पर जाने का मौका जरूर मिलेगा। लेकिन वो सब करते वक़्त शारीरिक अंतर का पालन करना, मास्क लगाना और सॅनिटायजर से हाथ धोने के नियमों का पालन तो करना ही पड़ेगा।

मास्क से आपको कुछ तकलीफ़ें हो सकती हैं जैसे कि सीढ़ियाँ चढ़ते वक़्त साँस फूल जाना। अगर ऐसा हो तो सीढ़ियाँ चढ़ते वक़्त मास्क निकाल दें लेकिन हाथ अपने चेहरे पर कहीं भी बिना लगाएँ। अपने ठिकाने पर पहुँचने पर अपने हाथ और मुंह साफ धोएँ, उसके बाद ही बाकी काम करें। इन सभी नियमों की अब आदत होनी जरूरी है। २०२० के अंत तक वैक्सिन आ सकता है लेकिन तब तक और उसके बाद भी मास्क ही आपकी पहचान बनना जरूरी है।

Saurabh Zemse


28 

Share


Saurabh Zemse
Written by
Saurabh Zemse

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad