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कहीं आप बच्चों पर ज्यादा निगाह तो नहीं रखती

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
28th Aug, 2020

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बच्चों को अपनी निगाह के सामने रखना किसे पसंद नहीं होता। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ बच्चों को अपनी मर्जी करने देना भी जरूरी है।हर वक्त उन्हें पूछते रहना कि कहां होकर आओगे,किस दोस्त के साथ थे कुछ बाहर का तो नहीं खाया, पढ़ाई कब करोगे कितनी तैयारी हुई कितनी देर पढ़ोगे,वगैरह वगैरह। बच्चों पर नजर रखना ठीक है , लेकिन हर वक्त सिर्फ टोकते रहना ठीक नहीं है उन्हें डिप्रेशन का शिकार बना सकतीं हैं । इसका एक परिणाम यह भी हो सकता है आपका बच्चा आपसे दूर हो सकता है आपसे वह क्षूठ भी बोलने लग सकता है ।माना‌ कि आप भावनात्मक रूप से जुड़े रहने के कारण ऐसा‌ करते हैं , लेकिन वयस्क हो रहे बच्चों को अपनी जींदगी में ज्यादा दखलंदाजी पसंद नहीं आती । इस‌‌वजह से‌ उनको ज्यादा दखलंदाजी पसंद नहीं आती इस‌कारण वे आपकी भावनाओं को नहीं समक्ष पाते।इस वजह से उनको लगता है कि उनकी आजादी पर अंकुश लगाया जा रहा है ।
बढते बच्चों पर नजर रखना बहुत जरूरी होता है। लेकिन उन्हें अपने बताते नियमों पर चलने की तौर जबरदस्ती उन्हें ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌डिप्रस करने लगती है बढ़ती उम्र‌ के बच्चों पर नजर रखने के साथ साथ आपको उन्हें छूट भी देनी चाहिए। सही ग़लत काफर्क समक्षा कर उन्हें अपनी मर्जी से भी चलने देना चाहिए। हमेशा ही आपकी उंगली थाम कर चलने वाला बच्चा कतयीन बनायै ।उसे आजाद सोच‌ रखने की मोहलत दे । हां नजर रखने के लिए आप उसके इंटरनेट कनेक्शन मोबाइल संरक्षण आदि को चेक कर सकतीं हैं ।और ज्यादा हो तो बच्चों के दोस्त के साथ संपर्क में रहे । बातों बातों में उनकी सोच‌समक्ष जानने की कोशिश करें । बच्चों की परवरिश आज के दौर की सबसे चोलैजिंग बात है ।आपकी ज्यादा दखलंदाजी आपके बच्चे को डिप्रेशन का शिकार ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌बना‌ सकतीं हैं ।

मंजू ओमर
क्षांसी
।ा।
।।

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