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कमला हैरिस : एक और भारतीय की उड़ा

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Rosy Malhotra
23rd Aug, 2020

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दुनियाभर के राजनीति से वाकिफ हर व्यक्ति की जबान पर आज एक ही नाम है, कमला हैरिस। कुछ ही दिनों में अमेरिका में राष्ट्राध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने जा रहे है और इसमें डेमोक्रॅटिक पार्टी की ओर से ‘जो बायडन’ ने अपना नामांकन दिया और उन्होने उपराष्ट्राध्यक्ष पद की उम्मीदवार के तौर पर कमला हैरिस का नाम अपनी ‘रनिंग मेट’ के रूप में घोषित किया था । हमारे लिए यह बात इसलिए गौरव की है क्यूंकी कमला भारतीय वंश की महिला है। आज तक हमने देखा है की सुंदर पिचाई से लेकर लिओ वराडकर तक कई भारतीय वंश के लोगों ने भारत का नाम हमेशा उंचा रखा है। जो बायडन की इस चुनाव की जीत के बाद अब अमेरिका जैसी महासत्ता के सर्वोच्च पद पर एक भारतीय महिला विराजमान है। इस घटना के पूरी दुनिया में कई सारे मायने हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल भारतियों के लिए यह अभिमान की बात है।


कमला की माँ श्यामला गोपालन चेन्नई मतलब ब्रिटिश काल के मद्रास में अपने पिता पी.गोपालन, माँ राधा और ३ भाई बहनों के साथ रहती थी। पी.गोपालन ब्रिटिश सरकार में बड़े औदे पर अधिकारी करते थे। श्यामला ने १९५७ में दिल्ली युनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के बारक्ले युनिवर्सिटी में प्रवेश लिया। यहाँ उनकी पहचान जमैका में अर्थशास्त्र में स्नातक पदवी संपादन कर आगे की पढ़ाई के लिए बारक्ले आए डोनाल्ड हैरिस इस कृष्णवर्णीय युवक विद्यार्थी से हुई। तब यूनिवर्सिटी की सिलबस में कृष्णवर्णीय लेखकों के पाठ नहीं पढ़ाने और इस तरह उनकी अनदेखी करने के खिलाफ छात्रों ने छिड़े आंदोलन में श्यामला और डोनाल्ड की मुलाक़ात हुई। दोनों में दोस्ती और प्यार होने के बाद शादी कर ली। फिर पहली बेटी कुमाला देवी मतलब कमला का जन्म हुआ। फिर माया का। श्यामला ने अपनी पीएचडी पूरी की और वो अपने कॅन्सर अनुसंधान में लग गई। कमला ७ वर्ष की थी तब असताना श्यामला और डॉनल्ड में तलाक हुआ।
श्यामला कॅनडा के मॅकगिल युनिव्हर्सिटी मे प्रोफेसर की नौकरी करती थी। माया और कमला माँट्रियाल की स्कूल में पढ़ रही थी। श्यामला ने दोनों पर भारतीय और अफ्रीकन दोनों संस्कार किए। वो उन्हे ऑकलंड का कृष्णवर्णीयों का इतिहास बताती थी। अपने माँ बाप की सारी खूबियाँ कमला में उतर आई थी।

कमला ने हॉवर्ड विद्यापीठ में शिक्षा पूरी होने के बाद युनिव्हर्सिटी ऑफ कॅलिफोर्निया से कानून में स्नातक किया। अल्मेडा काऊंटी के डिस्ट्रीक्ट अॅटर्नी कार्यालय से उन्होने अपने करिअर की शुरुआत की। २००३ में वो सॅन फ्रान्सिस्को की डिस्ट्रिक्ट अॅटर्नी बनी। कॅलिफोर्निया की अॅटर्नी जनरल बनी वो पहली महिला और पहली कृष्णवर्णीय व्यक्ति थी।

अमेरिका में ४ करोड़ लोग गरीब है जिसमें सभी वर्णों के लोग हैं। वो सभी सुविधाओं से वंचित हैं। मालिक गरीबों से कम वेतन पर मजदूरी करवाते हैं। कंपनी के वरिष्ठ लोग सारे पैसों से अपनी जेबे भरते हैं। अमीरों को टैक्स में रिहायतें मिलती हैं। लेकिन आम जनता को सुविधा देने, विषमता दूर करने में सरकार बिलकुल ध्यान नहीं देती। गरीबों को उनके हाल पर छोड़ देती है। ऊपर से अमेरिका बहुत लुभावनी लगती है लेकिन अंदर से वो खोखली बन चुकी है। उन अनदेखी और बेसहारा जनता के लिए कमला ने हमेशा सरकार को ललकारा है। कमला हैरिस भारतीय – आफ्रिकी वंश की होने के कारन वो वंचितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए सही व्यक्ति है इसमे कोई दो राय नहीं है।

जॉर्ज फ्लॉइड के मृत्यु के बाद अमेरिका में वर्ण और वंशभेद के विरोध में निदर्शन हो रहे है। ‘ब्लॅक लाईव्हज मॅटर’ इस मुव्हमेंट ने जोर पकड़ा है। पुलिस द्वारा होने वाली हिंसा के विरोध में कमला मैदान में उतरी है। सिस्टम में फैले वर्णभेद को उन्हे जड़ से निकाल फेंकना है।
२०१४ में कमला ने डग्लस एमहॉफ इस ज्यू और पहले शादी से २ लड़कियों के पिता से शादी कर ली है। उनके घर में हिंदू, ख्रिश्चन और ज्यू यह तीनों धर्म बसते हैं। भारतीय वंश की महिला की इस उड़ान की हमने सराहना करनी चाहिए। फिर उनका ट्रंप और मोदी विरोधक होना, हयुस्टन के ‘हाऊ डी मोदी’ प्रोग्राम में हिस्सा ना लेना और कश्मीर के लोगों पर लगाएँ प्रतिबंधों को ‘मानवता का हनन’ कहना, इस सबसे उनके समर्थन में कोताही नहीं होनी चाहिए।
कमला हॅरिस अमेरिका के आर्थिक, सेहत और शिक्षा की तरफ लोगों का ध्यान खींच रही है। उनके जीत के वजह से तो कोरोना के बाद की दुनिया जरूर बेहतर होगी।

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Rosy Malhotra

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