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प्रदूषण- कविता की जुबानी

K
Kavita
14th Aug, 2020

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प्रदूषण की सुनो कहानी,
आज आप सब कविता की जुबानी|
ये प्रदूषण वो प्रदूषण,
प्रदूषण ही प्रदूषण है|
जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, तेज ध्वनि भी प्रदूषण है|
आओ चले हम बात करें,
वायु प्रदूषण की बात करें|
कूड़े का हम ढेर जला के,
घर को अपने स्वच्छ करें|
इस अग्नि के धुएं से,
वायु को दूषित करें|
हम सब अपनी सासों को
मौत के द्वार तक पहुँचा रहें,
अपने आप पर गुमान करें
हम पर्यावरण बचा रहे|
आओ चले हम बात करें,
जल प्रदूषण की बात करें|
जल बचाओ, जल बचाओ
नारे हमने बहुत लगाएं,
फिर पश्चिम यमुना नहर में
नारियल हमने खूब बहाए|
तब जाकर मन की तृप्ति हुई
घर की पूजा सफल हुई|
आओ चले हम बात करें,
ध्वनि प्रदूषण की बात करें|
डी जे वाले बाबु मेरा गाना बजा दे
डी जे वाले बाबु मेरा गाना बजा दो,
रात में music रुक ना जाए
रात में musicरुक ना जाए,
शादी में पागल हुए
नागिन वाला डांस करके
मन हमारे प्रसन्न हुए|
सुन लो बात अब कविता की भी
प्रदूषण कम ना कर पाएंगे,
जब तक हम सब नहर में नारियल
तेज आवाज में डी जे वाला बाबु
इन बातों को यू ही अपनांएगे|
आओ मिलकर कसम ये खाएं,
वैज्ञानिक सोच हम सब अपनाकर
प्रदूषण को दूर भगाएं|

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