Bluepadआत्मनिर्भरता की ओर चले...
Bluepad

आत्मनिर्भरता की ओर चले...

S
Siddharth Deshmukh
13th Aug, 2020

Share


स्वावलंबन यह स्वातंत्रता की आत्मा है, यह एक वैश्विक सत्य है। स्वावलंबन भारत के लिए नया नहीं है। ब्रिटिश राज से स्वराज हासिल करने की नींव यह स्वावलंबन ही था। महात्मा गांधी का चरखा इसी का प्रतीक था। अपना देश कृषि प्रधान है, बाकी सारी चीजें भी हम बना ही रहे थे। उसीसे वस्तू विनिमय प्रणाली अस्तित्व में आई थी। ही प्रणाली के खतम होने के पीछे भी इसी प्रणाली ने इख्तियार किया हुआ जातिप्रथा का अमानवी रूप था।


एक गाँव को स्वावलंबी बनाने वाले काम बंद हो गए और उनकी जगह व्यापारियों ने ली। चमार गए और उनकी जगह बाटा और एक्शन आ गए। आज स्वतन्त्रता की ७२ वे साल में देश एक अजीब कैंची में अटका पड़ा है। एक तरफ खुली अर्थव्यवस्था स्वीकार कर ली है जिसकी वजह से कॉर्पोरेट और सेमी कॉर्पोरेट कंपनियाँ हमारे देश में आई। सरकार की परियोजनाओं में उन्हे प्रवेश मिल गया। बिजली कंपनी, अणुशक्ति, मेट्रो और मोबाइल कंपन्या ऐसी विदेशी कंपनियाँ यहाँ बस गई। और दूसरी तरफ लोगों को मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही हैं। विदेशी कंपनियों ने बिन जरूरत की चीजों को हमारे रोज़मर्रा की चीजों में तब्दील कर दिया। उसमें संगणक और मोबाइल तो हमारे शरीर के हिस्से बन गए। इन्ही चीजों से चीन जैसे देशों ने घुसपैठ की। इस आर्थिक मगरुरी पर वो हमारे ही जवानों पर हमला करने लगा था।
कोरोना की वज़ह से नई आर्थिक नीति पर विचार होने लगा था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी मौके को पकड़ कर “आत्मनिर्भर भारत” का आव्हान किया। उसके लिए २० लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की। इस आव्हान से युवाओं के सिने में जोश भर गया।

लेकिन प्रधानमंत्री की यह चाल चीन को पसंद नहीं आई। हमारे बगैर आप लोग कुछ भी नहीं कर सकते इस मगरूरी में चीन था। यहाँ सोनम वांगचूक ने देश के लोगों से कहा था की वो अपने फोन से चीनी एप्स निकाल दो। उन्होने एक दिन चीनी मोबाइल से निजात पाने का भी आव्हान किया। १५ जून २०२० को गलवान वैलि में उनकी मगरूरी ने २० भारतीय जवानों की जान ली। तब प्रधान मंत्री मोदी ने सभी ५९ चीनी एप्स पर निर्बंध लगाए तब चीन के पैरों तले से जमीन खिसक गई।

“आत्मनिर्भर भारत” की घोषणा करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा, “कोरोना संकट शुरू हुआ तब भारत में पीपीई किट बहुत कम थे। आज रोज करीब २ लाख पीपीई किट और २ लाख एन-९५ मास्क बन रहे हैं। ‘वसुदैव कुटुंबकम’ यह भारत की संस्कृति है और भारत की कार्यकुशलता का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा है। क्षयरोग, कुपोषण, पोलिओ इस पर भारत ने मुहिम चलाकर किए प्रयासों का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा है।“ आत्मनिर्भर भारत के लिए भारत की अर्थव्यवस्था, बुनियादी सुविधा, यंत्रणा, भौगोलिक स्थिति, मांग और आपूर्ति यह पंचसूत्री के मजबूतीकरण पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रधानमंत्री ज़ोर दिया।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लँड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ इन चार एल पर उन्होने ज़ोर दिया। कुटीर, गृह, लघु-मध्यम उद्योगों को गति देने से करोड़ो लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होने मध्यमवर्ग को ध्यान में रखते हुए आर्थिक विकास पैकेज में विशेष प्रावधान किए हैं। कोरोना काल में जिन ठेले वालों के काम बंद हो गए उन्हे हर एक को १०,००० रुपए देकर उनके काम फिरसे शुरू करने के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जाएगा। प्रधानमंत्री निजी क्षेत्र को अपना दुश्मन नहीं बल्कि अपने साझेदार मानते हैं। उनके साथ ही भारत को आधुनिक तरीके से आत्मनिर्भर होने की उनकी कल्पना है। उन्होने इन्फॉर्मेशन अँड टेक्नोलोजी के विशेषज्ञों को प्रोत्साहित करने के लिए अॅप इनोवेशन चॅलेंज यह अॅप लाया है। इसके साथ आज के महामारी के काल में कोरोना पर वैक्सीन इजात कर पूरी दुनिया को इससे बाहर निकालने के लिए आवाहन किया है। आत्मनिर्भर भारत यह स्वदेशी चीजों की मांग बढ़ाने के लिए उसका प्रचार करने के लिए प्रधान मंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” का नारा दिया है।
आने व्ले स्वतंत्रता दिन के उपलक्ष्य में सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ मिलकर ९ वी से १२ वी तक के बच्च्न के लिए “आत्मनिर्भर भारत” इस विषय पर निबंध प्रतियोगिता रखी है। इसकी पूरी जानकारी https://innovate.mygov.in/essay-competition/ यहाँ मिल सकती है। इसी तरह से अगर हम अपने झगड़े किनारे रख कर आत्मनिर्भरता की ओर चले तो ही इस संकट से उभर सकते

77 

Share


S
Written by
Siddharth Deshmukh

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad