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अति का भला न बरसना अति की भली न धूप

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
10th Aug, 2020

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हद से ज्यादा किया हुआ हर काम ख़राब होता है इस बात को साबित करता है कबीर जी का यह दोहा कि
अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।
सही बात है जिस काम की अति की जाती है वह ख़राब हो जाता है । फिर चाहे हद से ज्यादा बोला जाते या चुप रहा जाते । ठीक वैसे ही जैसे आसमान से जब बारिश बहुत ज्यादा होती है, तों वो भी घातक होती है और हद से ज्यादा धूप भी प्राण ले लेती है ।हम सभी को यह बात ध्यान रखना चाहिए । मुझे एक किस्सा तब याद आया जब बीते दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति से सामना हुआ ।मैं अपने परिवार के साथ घूमने के लिए देहरादून गई हुई थी ,हम सभी लोग नेचुरल सीन के साथ मौज मस्ती कर रहे थे। इसी बीच मेरी कजिन सिस्टर की नज़र एक बगीचे पर पड़ी।हम सभी ने वहां जाने का निर्णय किया और काफी लम्बा रास्ता पार करके वहां पहुंच गए। वहां जाने के लिए मैं बहुत उत्साहित थी, क्योंकि लीची और सेब काफी मात्रा में वहां लगे थे,मैं काफी तक चुकी थी लेकिन वहां का सौन्दर्य देखकर मेरी और मेरे परिवार की पूरी थकान उतर चुकी थी । बगीचे में मौजूद व्यक्ति से इजाजत लेकर हम सभी लोग घूमने लगे ।सेब और लीची और दूसरे पर खाने की कोई रोक नहीं थी ।पर ले जाने की मनाही थी । मुझे तो ऐसा लगा जैसे जन्नत में आ गये ।हम लोगों ने खूब फल खाते पेट भर गया पर मन नहीं भरा । किसी की बिना सुने मैंने जरूरत से ज्यादा खा लिया । फलों की अति ने भी अपना असर दिखाया ।और मैं बीमार पड़ गई ।हालत ख़राब होने पर वही अस्पताल में भर्ती कराया गया ।सारा घूमने का प्लान गड़बड़ हो गया ।उस दिन समक्ष आया कि अति किसी भी चीज की बुरी होती है ।

मंजू ओमर
क्षांसी

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