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जिंदगी खूबसूरत कैसे बनाएं ?

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Bhakti Nikam
10th Aug, 2020

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आपने अपने जीवन में कई सफलताएँ हासिल की है, कुछ असफलताएँ भी हाथ लगी है। जिंदगी का हर मक़ाम आपने पार किया है। कुछ अब भी बाकी हैं। फिर भी जिंदगी प्रॉब्लेम्स से भरी है। इसी में उलझे रहने से जिंदगी जीने का मौका मिलना बहुत मुश्किलसा लगता है। लेकिन हमारा जीवन वाकई बहुत सुंदर है। हमने ही उसे हजारो बातों में उलझा कर जटिल बना दिया है। यह उलझने अगर सुलझ जाएँ तो जीना आसान और बहुत खूबसूरत हो जाएगा, देखे कैसे।
वक्त का सही इस्तेमाल : हम दुनिया में जहां भी रहे हम तय समय पर अपने काम करते हैं। लेकिन कई बार कुछ अचानक हुई घटनाओं से अपना टाईम टेबल तितर बितर हो जाता है। फिर अपने नियमित कामों की गाड़ी पटरी पर लाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इतनी सी बात हमे परेशान करने के लिए काफी होती है। ऐसे में सब कुछ पहले जैसा होने के लिए आपका निर्धार बहुत जरूरी होता है। यह निर्धार हो जाए तो बाकी चीजें अपने आप सही होने लगती हैं। मान लो कि आपके कसरत करने के समय किसी का अपघात होने की खबर मिल जाए तो जाहीर है कि आप कसरत छोड़ कर उस आदमी के पास पहुँच जाएंगे। शायद उनके साथ एक हफ्ता, महिना या उससे भी ज्यादा समय लग जाए। तो क्या आप कसरत करना छोड़ दोगे? नहीं। ऐसे वक्त में जब भी और जहां भी मौका मिले आप कसरत कीजिए, चाहे वो किसी भी प्रकार की हो, लेकीन कीजिए जरूर। इससे आपको अपना टार्गेट पूरा करने का समाधान मिलेगा और इसी से आपकी गाड़ी धीरे धीरे पटरी पर आ जाएगी।
सही व्यक्ती का मार्गदर्शन लें : कुछ बातों का निर्णय हमसे नहीं हो पाता। इससे आई हताशा बाकी सब चीजों पर हावी हो जाती है और हमारी बेचैनी बढ़ती जाती है। इसमें आर्थिक, पारिवारिक परेशानियाँ, संबन्धों में अनबन, दोस्तों से लड़ाई, नौकरी व्यवसाय में रुकावटे ऐसे कई सारी बातें हो सकती हैं। इन मसलों का सामना हर किसी को कभी कभी करना पड़ता है और उनसे निजात पाना पड़ता है। हर समस्या का स्वरूप अलग होता है लेकिन अगर आप आपके नजदीकी व्यक्ती से बात करेंगे तो उनके अनुभव का आपको जरूर फायदा होगा।
किसी भी दबाव में ना रहें : हम मानते हैं कि मानव यह सामाजिक प्राणी है लेकिन हर बार आपने समाज की चौखट में ही रहना जरूरी नहीं होता। यह चौखटें जीवन के अनुशासन के लिए बनाई जाती हैं, जीवन एलपी बंधनों में रखने के लिए नहीं। “लोग क्या कहेंगे” यह टॅबू हमारे दिल पर हमेशा बूँदा हुआ रहता है। लेकिन अगर आप अच्छे उद्देश से इस टॅबू से उभर कर अकेले चल दिए तो आपके पीछे कारवाँ बनाता जाएगा।
स्वाभिमान रखें लेकिन गुरूर नहीं : लोगों को बुनियादी जरूरतों के साथ किस चीज की जरूरत होती है? स्वाभिमान की। किसी मामले में अपनी बात रखने का और उसे विरोध करने का अधिकार हर किसी को है। लेकिन किसी को नीचा दिखाने के लिए उसका अनादर करनेवाले शब्द बोल देने का ट्रेंड आजकल चल रहा है। अपमान जनक बातें सुनने के बावजूद उनसे झगड़ा तालने के लिए आप उन्हे उल्टा जवाब नहीं देते। लेकिन क्या वाकई हम वह अपमान भूलते हैं? यह जख्म हमेशा सिने से लगाए रखने से अच्छा है की आप उसे प्यार से जवाब दो। फिर भी उसका गुरूर कायम रहा तो उसे उसकी भाषा में जवाब दो। बस इस बात का खयाल रखो कि आपसे कोई गलत बात ना निकल जाए जिसका पछतावा आपको जिंदगी भर करना पड़े।
खेलें कूदें, पढ़ें, फिल्म देखें : हमेशा काम करने से आपके शरीर के साथ मन भी थक जाता है। तब मोबाइल पर नहीं बल्कि प्रत्यक्ष कुछ खेल खेलें। परिवार के साथ खेल खेलें नृत्य करें, गाने गाएँ, किताबें पढ़ें, सब मिलकर टीवी पर फिल्म देखें। बच्चों के पसंद की कार्टून सिरिज देखें। शायद आपको अपना बचपन भी इसमें मिल जाए।
सोशल मीडिया से दूर रहें : यह सोशल मीडिया जब से आया है तब से सुकून की जिंदगी हवा हो गई है, ऐसी शिकायत करने के बाद भी आप वो सुकून खोजने कहाँ जाते हैं? उसी सोशल मीडिया पर? इसमें गलत भी नहीं। भई आपके दोस्त और परिवार जहां हर बार तैयार बैठे हो वहीं पर आप भी जाएंगे। लेकिन अब इसका इस्तेमाल थोड़ा कम करो। अपने दोस्तों और परिवार में सीधा फतवा निकालो कि अगर जरूरत हो तो फोन करो। इससे आपसे कोई जरूरी जानकारी भी नहीं छूटेगी। एक बार सुबह और रात को सोने से एक घंटा पहले सोशल मीडिया पर एक सवारी कर आओ। लाइक, शेअर, सबस्क्राईब कर लो। आपको सोशल मीडिया पर अॅक्टीव दिखने के लिए इतना काफी है। वहीं पर अपना तम्बू गाड़े बैठने की जरूरत नहीं है। फिर देखना आपको कितना सुकून मिलता है।
ऐसी अनगिनत बातें शायद आपको भी पता होगी जिससे हम अपना जीवन आसान और सुंदर बना सकते हैं। क्या आप मुझे भी बताएँगे?

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