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घरेलू हिंसा

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
2nd Aug, 2020

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आज शारदा बर्तन धोने आयी तो उसके हाथ और चेहरे पर कयी जगह चोंट के निशान थे। मैंने उससे पूछा तो उसके आंखों में आंसू आ गए, कहने लगी कल रात पति ने पिटाई कर दी।जब मैंने कारण जानना चाहा तो पता चला शारदा की मेहनत की कमाई। दरअसल कुछ महीनों पहले मैंने शारदा को सलाह दी थी कि वह अपने और बच्चों के भविष्य के लिए कुछ पैसे बैंक में जमा करा दिया करें । पति को जब उसकी कमाई का पैसा नहीं मिला तो पिटाई कर दी । मैंने उसे न्याय की गुहार लगाने को कहा तो उसने कहा पति के खिलाफ जाऊंगी तो बदनामी भी होगी और सास घर से निकाल देगी।
यह कहानी सिर्फ एक शारदा की नहीं है , बल्कि समाज की कयी महिलाओं की हैं। पति खुद तो कोई काम करते नहीं है और फिर महिलाओं को काम करने के लिए बाहर निकलना पड़ता है। उसके बाद सामना करना पड़ता है घरेलू हिंसा, मारपीट और कयीतरह की बातों का ।यह कहानी सिर्फ निम्न आय या निम्न जाति के लोगों की ही नहीं है बल्कि समाज के कुछ सम्भ्रांत परिवारों की भी है । हां लेकिन बड़े घरों में घरेलू हिंसा का तरीका कुछ अलग होता है ।ऐसा भी देखने में आया है कि पूरा परिवार शिक्षा के क्षेत्र से जुडा हुआ है और घर में बहू घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है । दूसरों को सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाने वाले लोग ‌‌‌‌जब अपने ही घर में बहू बेटियों को इज्जत देने में असमर्थ है तो उम्मीद किससे की जायेगी ।।कमी बार तो घरेलू हिंसा इतनी विभत्स हो जाती है कि सभ्य समाज पर प्रशन चिन्ह लग जाता है ,और वही दूसरी ओर समाज इतना आधुनिक हो गया है कि मानवीय संवेदनाएं दम तोड़ रही है । पड़ोस में कौन पीट रहा है और कौन पीट रहा है इससे उन्हें कोई मतलब नही होता। घरेलू हिंसा बढ़ने का एक कारण यह भी है कि घर की बदनामी होगी या मेरा क्या होगा बच्चों का क्या होगा इत्यादि इत्यादि । महिला ममता के साथ साथ शक्ति का भी विशाल सागर है । लेकिन कमी बार इस तरह के संघर्ष में वह आत्म हत्या करना ज्यादा आसान समक्षती है यह समाज के लिए बेहद निंदनीय है । मातृत्व के साथ पारिवारिक कलह क्षेलना आसान काम नहीं है । अंत में मैं आप सभी स्त्रियों यहीं कहना चाहती हूं कि यदि आप किसी भी तरह की हिंसा का शिकार है तो अभी इसी वक़्त इसके खिलाफ आवाज उठाईये। फिर आपका कोई साथ देने या न दे। अपनी आजादी और सम्मान की लड़ाई में शक्ति का प्रदर्शन करने की शक्ति आपमें है आपके अंदर मौजूद हैं बस जरूरत है तो उसे पहचानने की और अपने लिए न्याय पाने की

मंजू ओमर
क्षांसी

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