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बोलिए लेकिन सोच समझ कर

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
19th Jul, 2020

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बोल कर ही हम अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते हैं । हमें कैसे बोलना है यह बात महत्वपूर्ण है । अक्सर जब हम लाईट मूड़ में होते हैं तब बिना सोचे समझे कुछ भी बोल देते हैं ।और फिर बाद में पछताते हैं । हमें ध्यान रखना चाहिए कि अच्छा और सच्चा बोलना हमारी पहचान होता है । अच्छे बोल हमारे लिए तरक्की यश , सम्मान और आतमियता के दरवाज़े खोलते हैं। वहीं बिना सोचे समझे बोलना कभी उपहास और कभी हीन भावना का शिकार बनाता है ।

आपके शब्द आपकी भावनाओं को प्रगट कर ही देते हैं ।मन में किसी के प्रति ईष्र्या का भाव होगा,तो शब्द भी वैसे ही निकलते हैं ।क्रोध सभी को आता है, लेकिन समय रहते उस पर काबू पा लेना हुनर है ।जो सभी को आना चाहिए । कभी कभी दूसरों की भावनाओं का ख्याल किये बगैर हम बेहद कटु शब्दों का प्रयोग कर देते हैं,जो जीवन भर हरे रहने वाले घावों की तरह होते हैं। याद रखें एकं बार खंजर के गांव तो ठीक हो जाते हैं लेकिन शब्दों के घाव नहीं भरते।हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। बातें ही तो किसी को नजरों से गिरा देती है और किसी को उठा देती है ।इस बात का एक पक्ष में भी हैं कि हमें मधुर बातें तो करनी चाहिए लेकिन उतनी भी नहीं किवह आपको चापलूस सिद्ध करे। इन दोनों बातों से बचने के लिए हम सभी को संतुलित, स्पष्ट और तथ्यपूर्ण बात करनी चाहिए

मंजू
ओमर
क्षांसी

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