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परछाईं

Shubham Kokale
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16th Jul, 2020

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परछाईं तु क्यु हमेंशा साथ देतीं हैं? तु लहराथी हैं, मचलती हैं, नाचती हैं॥ परछाईं तु क्यु हमेंशा साथ देतीं हैं? तु रुलाती हैं, सताती हैं, जलाती हैं॥ परछाईं तु क्यु हमेंशा साथ देतीं हैं? रोशनी में दिखती हैं, अंधेरे में गायब हो जाती हैं, तु सुलाती हैं और जगाती भी हैं॥ परछाईं तु क्यु हमेंशा साथ देतीं हैं? तु कल में लेके जाती हैं, और आज में दिखती हैं॥ परछाईं तु क्यु हमेंशा साथ देतीं हैं? एक दिन मेरा भी आयेगा, सब होगें, रोशनी भी होगी, तु भी होगी, लेकिन दिखेगी नहीं, क्यु की मेरे भीतर अंधेरा समा जाऐगा॥ तभी भी साथ रहुंगा, एक तस्वीर में परछाईं बन जाऊँगा, एक दिन तु मेरे साथ हमेशा थीं, आज में तेरे साथ हमेशा...॥

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