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आंसू....

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
11th Jul, 2020

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ये आंसु बहुत बेशकीमती होते हैं , कयोंकि इन पर जमाने के कडे पहरे होते हैंं,
खुश होने का दबाब इतना ज्यादा है ,हम अकसर छुप कर रोते हैं।
गर ऑखो मे हों ऑसू ,तो हम नजरें मिलाने से भी डरते हैं,
ये हाल ए दिल बयां कर देते हैं,शायद इसलिये सामना करने से डरते हैं।

इन्हे यूं ही जाया मत करो, ये अपने अकसर हमसे कहते हैं,
पर इन पर अपना कोई जोर नही, ये मानने से कब हम इन्कार करते हैं।

दर्द मे डूबा दिल तन्हाई मे अकसर रोना चाहता है,
पर जमाने की ये हिदायत है ,ये हमे कमजोर बनाता है,
ये बेजुबां दिल की भाषा है, इसे हर अपना समझ जाता है,
दिल का हर गुबार निकल जाता है,ये दिल फिर संभल जाता है।

दर्द ए दिल की भाषा भी आँसू ,
खुशहाल दिल की भाषा भी आँसू ,
सुख -दुख .....दोनो मे आंसू, ये कैसी अजब परिभाषा है
होंठों पर हंसी और आंखों मे नमी, ये कैसी गजब पराकाष्ठा है ।

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