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नासमझ

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G.s.bist
7th Jul, 2020

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  • नासमझ

आज फिर पापा रिस्पना पुल पर जाएंगे,
काम ढूंढेंगे।
उनको कोई ,
काम करने के लिए ले जाएगा,
मैंने, आज फिर
दवाई लाने को कहा,
मम्मी बहुत बीमार है।
पापा चले गए ‌।
मैं दिन में मम्मी को देखती रही,
उन्हें पानी के लिए पूछती रही,
शाम को पापा आये ,
मैंने उनके हाथ से थैला लिया,
मम्मी की दवाई ढूंढी
नहीं मिली
पापा से पूछा ,मम्मी की दवाई कहां है
पापा चुप थे
मैंने फिर पूछा
पापा फिर चुप थे
कुछ नहीं कहा, मेरे हाथ में दो टाफी रख दी,
मम्मी ने कहा क्यों पापा को तंग करती है ?
पापा को काम नहीं मिला होगा,
आज,पापा बहुत उदास थे
तुम ये टाफी खा लो,मम्मी,
तुम ठीक हो जाओगी,
पापा धीरे से बोले,
लाकडाउन हो गया है
मैंने पूछा ये क्या हुआ,
बोले तू अभी छोटी है
अभी नासमझ है।
पापा की आंखों में आंसू आ गये।
पापा के आंसू देख,
मैं,नासमझ भी रोने लगी।
जी एस बिष्ट
(रिसपना पुल देहरादून में वह जगह ,जहां पर मजदूर काम की तलाश में जमा होते हैं )

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