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रिश्ते

K
Kavita
6th Jul, 2020

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भगवान की सुंदर रचना थी ये दुनिया,
हमने इसको क्या से क्या कर दिया|
रिश्तों को पैसों में तोला,
पहना बुराई का चोला|
ये दुनिया सारी जुडी़ हुईं थी,
हमने सारे बंधन तोड़ दिए|
दो पैसों की खातिर हमने,
सारे अपने छोड़ दिए|
पिता को हमने गलत ठहराया,
भाई बहन को लड़वाया|
क्यों पढ़कर भी अनपढ़ हुए,
सत्य को छोड़ गलत पर डटे हुए|
अभिमान का चोला पहने हुए,
क्यों रिश्तों को हमने तोड़ दिया|
क्यों रिश्तों को हमने तोड़ दिया||
क्या यही हमारा लक्ष्य था,
क्या यही हमारे सपना है,
क्या यही हमारे रिश्ते है,
जिनको हम अपना कहते हैं|
इनको जोड़ने की बजाय,
हमेशा तोड़ने की कोशिश करते हैं|

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