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PM मोदी ने गलवान जा कर चीन को दिखा दिया भारत है कितना बलवान

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Shikhar Atri
5th Jul, 2020

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PM मोदी का अचनाक गलवान दौरा चीन को ये दिखाने के लिए काफी है कि भारत अब पहले से ज्यादा बलवान और बुद्धिमान है और वही हर तरह से चीन से निपटने के लिए तैयार भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये दौरा कुछ न कहकर भी बहुत कुछ कहता है। सरहद पर तैनात जवानों का मनोबल कैसे एक प्रधानमंत्री होने के नाते बढ़ाना चाहिए यह PM मोदी ने बखूबी दिखा दिया है। वहीं विपक्षियों के मुँह पर एक करारा चांटा भी लगा है।


दरअसल भारत ने अभी ये फैसला लिया है कि अगले दस दिन तक अगर पूर्वी लद्दाख पर चीन की सेना पीछे नहीं हटती है, तो उसके बाद ही भारत कोई एक्शन लेगा। देश की सीमा पर दिन-रात तैनात हमारे जवान बिना किसी डर के देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने को तैयार रहता है।



PM मोदी ने जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ साथ ये भी बता दिया की मैं अपने जवानों के साथ हमेशा खड़ा हूँ और हमेशा खड़ा रहूँगा। आपको बता दें की ये दौरा पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करने वाले थे। लेकिन उनके दौरा करने से पहले प्रधानमंत्री खुद लद्दाख पहुँच गए और जवानों का हाल जाना और सीमा पर किस तरह की रणनीति है उसका भी जायज़ा लिया।


वहीँ एक तरह जहां आये दिन पाकिस्तान कुछ न कुछ आतंकविरोधी घटनाए करता रहता है। उसे भी इस बात का अंदाजा हो गया है कि अगर हमने भारत से ज्यादा चालाकी करने की कोशिश की तो भारत पाकिस्तान पर भी कोई एक्शन लेने में नहीं चूकेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश को आत्मनिर्भर बनाने की सलाह देना ये पूरे भारत के लिए गेम चेंजर माना जा सकता है। वही इस बात से पूरी दुनिया को भी चीन को बॉयकॉट करने का संदेश भी जाता है, जो बहुत जरूरी है। भारत का आने वाला कल भी इस बात पर निर्भर करता है की वह कितना जल्दी आत्मनिर्भर होने को तैयार होता है।


फिलहाल मुद्दे की बात यह हैं की प्रधानमंत्री की अचानक लद्दाख यात्रा चीन समेत पाकिस्तान को भी हजम नहीं हो रही है। इससे पहले जब चीनी सैनिकों से भारत के सैनिकों की झड़प हुई उसके बारे में प्रधानमंत्री ने चीन की विस्तारवादी नीति और भारतीय जवानों की शहादत की चर्चा की थी। साथ में यह भी चेतवानी दी थी कि इसका बदला भारत जरूर लेगा। जिसके बदले की शुरुआत भारत ने चीन के 59 अप्प्स को बैन कर दिया।



जब लद्दाख में PM मोदी ने सेना को संबोधित किया, उसमें भी बिना चीन का नाम लिए उन्होंने चीन की विस्तारवादी और हिंसक मानसिकता के बारे में बताया । जबकि पूरी दुनिया विकास और शांति के लिए उदिग्न है, वहीं कुछ देश दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने की साजिश रच रहे हैं। 


जिसका असर ये हुआ की चीन ने भारतीय प्रधानमंत्री की लद्दाख यात्रा को गंभीरता से लिया है और इतना ही नहीं चीनी अप्प्स को बैन करने के बाद उसके विदेश मंत्रालय से ये भी जवाब आया की हम भारत के साथ बैठकर बात करने को तैयार हैं। देश के सभी नागरिकों को इससे ये तो समझ में आ ही गया होगा की भारत चीन से डरता नहीं है। बल्कि वह कूटनीतिक तरीके से चीन को मात देगा और उसे घुटनों पर गिरा कर मानेगा। हालांकि ये इतना आसान नहीं है जितना की पड़ने में लगता है। वैसे भी ये भारत है जहां आसानी से कुछ हासिल नहीं होता है।


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