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हमारी बेटियां

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
2nd Jul, 2020

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आज मैं और मेरी पड़ोसन किसी के घर शोक प्रकट कर आटो से घर आरहेथे ।हम लोग आपस में बेटियों के बारे में बात कर रहे थे ।हम लोग जिनके घर गए थे उनके तीन बेटियों है । पिता के अचानक देहांत के बाद तीनों मां को अपने पास रखने की प्लानिंग कर रही थी । हमारी बातें सुन कर पास में बैठी महिला बोल पड़ी सच कह रही है बहन आप आजकल बेटियों बेटों से कम है क्या। उसने बताया कि वह एक साधारण परिवार से है और उसके दो बेटियां और एक बेटा है । बेटियों को ज्यादा नहीं पढ़ाया लेकिन बेटेकीपढाई अच्छे से कराई और पैसों का‌ बंदोबस्त करके बेटे का पालिटिकिनिक में दाखिला कराया ।घर के हालात देखकर बेटियों ने छोटे-छोटे बच्चों की ट्यूशन लेकर पैसे कमाती है और अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालती है और घर में भी सहायता करती है वहीं बेटा एक साल फेल हो चुका है और पूरे दिन आवारा गर्दी करता रहता है ऐसे कई किस्से कहानियों आपके घर के आसपास भी मिल जायेगें।
आज बेटियां किसी से कम नहीं है हर क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर रही है । कहते हैं बेटियां हर कदम पर साथ निभाती है । कोई भी दुःख तकलीफ़ हो बेटियों सबसे पहले ले आगे आतीं हैं बेटियों ने हर कदम पर अपने परिवार शहर और देश का नाम रोशन किया है । लेकिन आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो बेटियों को बोझ मानते हैं । हमारे घर की स्वाभिमान है बेटियों अब ये बात सभी को समक्ष जानी चाहिए ।

मंजू ओमर
क्षांसी

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