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मजदूऱों की मंडी

Umesh Shukla
Umesh Shukla
1st Jul, 2020

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अब भी यहाँ लगा करती
है नित मजदूऱों की मंडी

यहाँ नियम निर्रथक सारे
और सब कानून हैं बंदी

कर्मकार हैं यहाँ बड़े बेचारे
हरदम अनिश्चितता के मारे

इसीलिए कुछ अंतराल पर
यहां घेरा डाला करती मंडी

अब भी यहाँ लगा करती
है नित मजदूरों की मंडी

धनिक यहाँ ही सब गुण धारे
वे सत्ता व तंत्र सभी के प्यारे

अक्सर धनिक रौंदा करते
हैं सब नियम और कानून

धनार्जन के लिए सब तंत्र से
कर लेते हैं प्राय; दुरभिसंधि

अब भी यहां लगा करती
है नित मजदूऱों की मंडी

आजादी के बाद से अब तक
जो भी श्रम कानून बने थे

मजदूरों के हित जिनसे कुछ
सीमा तक सुधरे संभले थे

कोरोना के नाम पर सरकार ने
हटा दी सब नियमों की पाबंदी

अब भी यहां लगा करती
है नित मजदूऱों की मंदी

बड़ा प्रश्न यह धनिकों पर
जब कोई नकेल न होगी

फिर मजदूऱों के कल्याण की
उनको फिक्र क्यों होगी

आर्थिक विकास के नाम पर
हो रही है केवल चोचलाबंदी

अब भी यहाँ लगा करती
है नित मजदूऱों की मंडी

कहने को हैं देश में बहुत
सारे राजनीतिक दल

पर सबकी प्रथमिकता
बस सत्ता प्राप्ति केवल

मजदूऱ हितों के लिए वे नहीं
करते कभी भी मोर्चाबंदी

अब भी यहां लगा करती
है नित मजदूरों की मंडी

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Umesh Shukla
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