Bluepadचीनी अॅप्स पर प्रतीरोध, चले आत्मनिर्भरता की ओर
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चीनी अॅप्स पर प्रतीरोध, चले आत्मनिर्भरता की ओर

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Sanjana Nayar
1st Jul, 2020

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लड़ाई सिर्फ सीमा पर नहीं लड़ी जाती बल्कि सीमा के अंदर भी लड़ी जाती है। सीमा पर आक्रमण करने वाला शत्रु और देश के अंदर का शत्रु अगर एक ही हो तो यह लड़ाई का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। आज वैश्विक व्यापार पर अपना कब्जा करने की होड में ऐसा कौन सा देश है जो अपने ही बने बनाए बड़े बाजार पर हमला करने की मूर्खता करेगा? शायद कोई नहीं। लेकिन चीन इन सब बातों से परे है। शायद अपनी आर्थिक संपन्नता की घमेंड में उसे लग रहा है कि उसके सामने कोई टिक नहीं पाएगा। लेकिन भारत की जनता ने उसे ऐसे चित पट कर दिया है की उसकी रीड की हड्डी ही हिलने लग जाएगी। पहले तो लद्दाख के शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आवाहन पर देश वासियों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर दिया। और अब अपने मोबाइल के सभी चीनी अॅप्स डिलीट कर दिए है। यह पहल लोगों ने अनायास ही कर दी थी। अब २९ जून २०२० को उस पर सरकारी मुहर लग गई है। भारत सरकार ने ५९ अॅप्स को भारत में प्रतिबंध लगा दिया है। अब इस महासत्ता की अकड़ उतरने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा।

पहले तो इन चीनियों ने सारी दुनिया को कोरोना विषाणु दिया। इसकी भनक जागतिक आरोग्य संघटन को भी लाग्ने नहीं दी। और जब दुनियाभर में इसका प्रकोप बढ़ गया तो अपने हाथ खड़े कर दिये। लेकिन सत्य सूरज कि तरह तेज होता है, क्या यह भगवान गौतम बुद्ध के सामने नतमस्तक होने वाले इन चीनियों को पता नहीं था? उनकी पोल खुली और पता चला की कोरोना तो चीन के वुहान से ही निकला था। अमरीका ने उन पर २० ट्रिलियन मतलब बीस लाख करोड़ डॉलर्स का जुर्माना लगाया और उनकी देखादेखी बाकी देशों ने भी वैसा ही किया। उसने अपना सामरिक सामर्थ्य दिखाने के लिए भारत के गलवान वैलि में सीज फायर और शस्त्र न उठाने का नियम होते हुए भी नुकीले कील ठोके हुए लट्ठों से हमारे जवानों पर हमला किया जिसमे हमारे २० जवान शहीद हो गए। इतना होने के बाद कौन देशभक्त होता जो चुप बैठता! आज की ५९ अॅप्स का प्रतिरोध चीन को सामरिक हमलों से ज्यादा भारी पड़ने वाला है।
यह ५९ चीनी अॅप्स उसका इस्तेमाल करने वालों की पूरी जानकारी मतलब पूरा डेटा चीनियों को आसानी से दे सकता था और उसमें छेड़छाड़ भी कर सकता था। इन अॅप्स पर प्रतिरोध लगाते समय सरकार ने बताया है कि यह अॅप्स देश और राज्यों की सुरक्षितता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए धोका निर्माण कर सकते थे। इसके साथ पता चला था कि यह अॅप्स सेवा और शर्तों का उल्लंघन कर ग्राहकों की गोपनियता भंग करते थे।

भारत में यूट्यूब से ज्यादा टिकटॉक अॅप के यूजर ज्यादा हैं। टिकटॉक अॅप के करीब २० करोड़ यूजर हैं वही हेलो अॅप के ४० हजार यूजर हैं। वैसे हमे इस इंटरनेट के जाल की वजह से अपनी बात कहने के प्लॅटफॉर्म्स मिलते हैं। लेकिन मजे की बात यह है की हम उन देशों के बने अॅप्स और सोशल मीडिया पर ही उनकी बुराई करते हैं। इस बुराई से उन देशों को कोई फर्क नहीं पड़ता क्यूंकी उनके लिए आपके विचारों के कोई मायने नहीं होते, उन्हे मतलब है तो बस आपके पोस्ट से उनकी तिजोरी में पड़ने वाली रकम से। लेकिन अब कहा जा रहा है की यह अॅप्स बंद होने की वजह से उनकी आय बंद और भारत के स्टार्ट अप को गति मिल जाएगी।

हमारे देश को अस्त्र और शास्त्रों की बड़ी पुरानी परंपरा है। लेकिन आधुनिक गझेट के मामले में हम थोड़े कम पड़ गए जिसका फायदा हितशत्रुओं ने उठाया। लेकिन अगर हमें हर मामले में आत्मनिर्भर होना हो तो यह प्लॅटफॉर्म्स भी हमारे अपने होने चाहिए। हमारे देश में भी गेम्स और चैटिंग अॅप्स हैं लेकिन विज्ञापन के मामले में वो थोड़े कम पड़ गए और चीनी अॅप्स सब पर हावी हो गए।

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