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देशभक्ति

Megha Agarwal
Megha Agarwal
2nd May, 2020

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अजीब फसाना है इस शब्द का जनाब,
शब्द छोटा और अर्थ सबसे परे हैं इसका,
किसी के लिए डीपी और स्टेटस तक साथ निभाती हैं,
तो किसी की इस दुनिया में यह जान बन जाती हैं,
कोई इसके लिए अपना घर परिवार संसार छोड़ देता है,
तो किसी के लिए यह खुदा और संसार बन जाती है,
कोई सरहद पर जाकर देशभक्ति का जज्बा दिखाता है,
तो कोई घर में रहकर भी देशभक्ति की नई दास्तां लिख देता
पर हर देशवासी के मन में यह तिरंगा जरूर छप जाता है,
कोई धर्म जाति के नाम पर वतन भूल जाता है,
तो कोई वतन को ही वास्ते धर्म जाति और अस्तित्व बना
लेता है,
कोई देश के लिए छोटा सा दान करने में भी घबराता है,
तो कोई अपनी जवानी अपना सब कुछ इस पर कुर्बान कर
बेपरवाह हो जाता है,
जरिया अलग अलग है देशभक्ति को अपनाने का जनाब,
कोई शोर मचाकर कुछ नहीं कर पाता है,
तो कोई ख़ामोशी की चादर ओढ़े सब कुछ कर जाता है,
गद्दारों की बात सुनकर जहां फौलादी बन कोई शस्त्र उठा
लेता है,
तो कोई शांत रहकर अपने कामों से उन्हें करारा जवाब देता
कुछ तो बहुत खास है मेरे वतन की माटी में साहाब,
यहां कोई घर में बैठकर देश की सुरक्षा कर देश बचाता है,
तो कोई खाकी,सफेद कोट पहन और हर छोटे रूप में देश
का कर्ज अदा करने की ठान लेता है।


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