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वर्षा अश्रू...
सुख- दुःख आपल्या कल्पनेतले.

संदिपकुमार
संदिपकुमार
28th Jun, 2020

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वर्षा अश्रू...
सुख- दुःख आपल्या कल्पनेतले..
- कवी:- संदिप कुमार
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बाष्प जमता नभी
दाटून ढग येती...
न सहावे त्राण त्यांस आता...
संघर्ष हा ढगांचा पेटूनी
चमकती वीज.. आभाळ फाडूनी
वर्षा धारा कोसळती...
वसुंधरा हर्षून भिजती...

दुःख संचिता मनी
दाटून कंठ येती...
न सोसवे तीव्र वेदना
त्यांस आता
कंठ वज्रासमान... जड होता
येता वादळाचे हुंदके
बांध उराचा फुटूनी
अश्रू डोळ्यातून गळती....
--- कवी:- संदिपकुमार
लेखन दिनांक:- 04/04/2020
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संदिपकुमार
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