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वर्साय की संधि - पुनः

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Swati Sharma
28th Jun, 2020

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आज का दिन विश्व में अपना एक अलग महत्व रखता है ये तो आप सभी जानते ही हैं तो आज इसी दिन के बारे में बात करते हैं आज ही के दिन विश्व में एक बड़ी और महान संधि के साथ प्रथम विश्व युद्ध का अंत हुआ था.पहले तो हम ये जानते हैं कि क्या हुआ था 1919 में फिर हम बात करेंगे आज इसका क्या महत्व है
हम सभी जानते है की प्रथम विश्वयुद्ध में सम्पूर्ण विश्व २ बड़ी शक्तियों में विभाजित हो गया था
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पराजित जर्मनी ने 28 जून 1919 के दिन वर्साय की सन्धि पर हस्ताक्षर किये। इसकी वजह से जर्मनी को अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ा, दूसरे राज्यों पर कब्जा करने की पाबन्दी लगा दी गयी, उनकी सेना का आकार सीमित कर दिया गया और भारी क्षतिपूर्ति थोप दी गयी।जर्मन लोग इसे अपमानजनक मानते थे और इस तरह से यह सन्धि द्वितीय विश्वयुद्ध के कारणों में से एक थी।


संधि होने के बाद से ही उसकी व्यवस्थाओं को जर्मनी द्वारा भंग किया जाता रहा। साथ ही संधि प्रावधानों में संशोधन भी किए जाते रहे। इन संधि प्रावधानों के उल्लंघनों एवं संशोधनों ने संसार को द्वितीय विश्व युद्ध की ओर ढकेल दिया। संधि प्रावधानों का उल्लंघन एवं संशोधन इसलिए किया गया कि यह अत्यधिक कठोर एवं अपमानजनक थी। ऐसी कठोर एवं अपमानजनक संधि की शर्तों को कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र एक लंबे समय तक बर्दाश्त् नहीं कर सकता था।
अतः यह स्पष्ट था कि जर्मनी भविष्य में उपर्युक्त अवसर मिलते ही वर्साय संधि द्वारा थोपी गई व्यवस्था से मुक्त होने तथा अपमान के कलंक धोने का प्रयास करेगा
तो ये तो बात हो हुई इतिहास की , आईये अब हम अपने वर्तमान में इसकी महत्वता को देखने , दोस्तों आज जो समय है वह भी हमारे लिए किसी युद्ध से कम नहीं है , बस फर्क इतना है की प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में विश्व २ शक्तियों में बंट कर युद्ध कर रहा था , और आज सम्पूर्ण विश्व एकजुट होकर एक वायरस से युद्ध कर रहा है
दोनों विश्व युद्ध में जैसे जन धन हानि हुई थी वही स्थिति आज भी है , आज भी कितने लोग इस वायरस  के साथ युद्ध करते करते अपने जीवन से हार  गए वही कुछ ने जीत भी हासिल की है , विश्व की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह डगमगा गयी है
आधी दुनिया अपने अपने घर में बंद हैं
तो आज फिर समय के एक संधि का जो हमारे लिए इस युद्ध के समापन में योगदान देगी , लेकिन ये संधि २ शक्तियों या व्यक्तियों के बीच नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति और हमारी प्रकृति के बीच करना है ,जी हाँ आज हमे प्रक्रति से यह वादा करना है कि पिछली की गलतियाँ  जो हमने जाने अनजाने में प्रकृति के विरुद्ध जाकर की हैं , हम उन्हें सुधारेंगे .
हम न सिर्फ खुदको बल्कि सम्पूर्ण समाज को पर्यावरण और प्रकृति नियमो के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करेंगे
हमे ये संधि न सिर्फ आज बल्कि आजीवन निभाना है , क्यूकि हमने पहले भी देखा की प्रथम विश्व युद्ध समापन में की गयी वर्साय की संधि का पालन न करने पर दुनिया को  द्वितीय विश्व युद्ध का सामना करना किया इसलिए हमे प्रकृति के साथ अपनी संधि को निभाना है और आने वाली  पीढ़ी को भी इसका हिस्सा बनाना है
मुझे उम्मीद कोरोना काल के इस दौर के जीवन शैली और आने वाले समय में लाये जाने वाले आवश्यक परिवर्तनों को लेकर  जो बात मैं आपसे कहना चाहती थी वह इस लेख के माध्यम से कह पाई हूँ,इस जंग में हम फिर से जीतेंगे बस तब तक अपना धैर्य और भरोसा बनाये रखे और जितना हो सकते मदद की भावना को बढ़ाये , साथ ही अपनी और अपने आसपास जितना कर सके लोगो को जागरूक करें
धन्यवाद्

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Swati Sharma

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