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बाबा का सहारा

Shailendra Verma
Shailendra Verma
27th Jun, 2020

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शिर्षक- बाबा का सहारा
न दौलत चाहिए ,न शौहरत चाहिए.... जिनको पकड़कर चलना सिखा था..... फिर उन उँगलीयों का सहारा चाहिए...(१)

अकेला हो गया बाबा दूनीया के झमेले मे... खो सा गया हुँ रंजो ग़म के मेले मे.... रोता बहुत हुँ बाबा अब तो अकेले मे... भँवर मे हुँ फिर वही किनार चाहिए...(२) पकड़कर.......सहारा चाहिए।
रिशते तो मिले लेकिन सबकी किमत थी.. मुँह देखे के नाते दिखावे कि उल्फ़त थी.. जाता किधर हर ओर झुठो कि हुकुमत थी.. मुहोब्बत के नाम पर बस तिज़ारत थी.... पतझड़ हे बाबा फिर वही बहारा चाहिए...(३) जिनको पकड़कर........सहारा चाहिए।

पिता थे ज़िदगी मे मेरे छांव बरगद की... वही थे जीवन मे तिजौरी मेरी चाहत की... बैरंग दुनीया मे बनके रहे वो तस्वीर रंगत की.. काली रात हे वही रोशन सितारा चाहिए.(४) जिनको पकड़कर..........सहारा चाहिए।
✍शैलेन्द्र कुमार वर्मा उपनाम-शैलेन्द्र "उज्जैनी" मो.न.9165502838

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