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सिखिऐ खुश रहने की कला

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
27th Jun, 2020

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अपनी खुशियों की चाबी हमेशा अपनी ही जेब में रखनी चाहिए अजमा के देखिए ,,,

‌‌‍‌‍‍॰ सबसे पहले यह संकल्प लिजिए कि आज से खुशी ही मेरे लिए सबसे बड़ी चीज होगी ।इस खुशी के लिए मन में जोआऐ वो किजिए । कोई शौक कोई भी काम या खुद का ख्याल रखने का काम ।
॰ मन मस्तिष्क पर सुख रस को हावी। होने दीजिए । जीवन की देखी सुनी या पढी विकृतियों को हटा कर जहां तहां से खूबसूरती, मिठास और अच्छी बातें तलाशिए ।
॰ अखबारों से अपराध के समाचार पढ़ना छोड़ कर लोगों के उपलब्धियों के बारे में पढ़िए, उनके जुनून और संकल्प के बारे में जानिए और उनसे प्रेरणा लिजिए ।
॰ मन की पुकार को सुनिए । कुछ क्षण सिर्फ भीतर क्षांक कर अकेली हो जाइए ,उन क्षणों में सबसे कट जाइये। कभी कभी एकान्त और मौन भी बड़ा सुख देता है ।
॰ जो कुछ बांट सकती है खूब बांटिए। इससे बढ़ कर कोई सुख नहीं हैं । बांटने से और बढ़ेगा घटेगा नहीं ।
॰ किसी से मिलने पर नमस्कार करनें में कंजूसी न करें इससे सौहार्द बढ़ेगा , मान सम्मान और प्यार भी मिलेगा ।

॰ जो प्यार का इजहार न कर सके उसका इंतजार मत करिए , न उससे नाराज़ होइये । वही चीज कहीं और बहुत से लोग दे देंगे । उन लोगों पर ध्यान दिजिए और उनकी संगत में खुश रहिए ।
॰ खुशी के लिए विशेष योजना बनाना और न मिलने पर निराश हो जाना बड़ा कष्टदायक होता है । इसलिए खुशी कंधों स्वयं जहां तहां से आने दें उसे बलपूर्वक अपनी ओर न घसीटें ।
॰ मुक्षेबचपन से लेकर आज तक कोई खुशी नहीं मिली, ऐसा कहने वाले यह भूल जाते हैं कि उन्होंने ऐसे विकलांग देखें है जो बहुत खुश रहते हैं ।
॰ ईष्र्या न करें मखमल के गद्दों पर सोने वाले करोड़ों रूपए रहने पर भी ईष्र्या का दंश सुखी नहीं रहने देता ।
॰ प्यार का खुमार उत्तर भी जाते तो क्या, उसकी मिठास और गर्महाट को बनाए रखें ।
॰ अपनी असफलताओं के लिए अतीत को याअभिभावकों को दोष न देकर स्वयं प्रयास करें किया कुछ पा सकें और वर्तमान परिस्थितियों में जीवन को बेहतर बना सके ।
॰ जीवन के अंधियारे पक्ष में हिम्मत न‌हारे। खुशी का सूरज निकलेगा यह भी सच है ।
॰ आंख खोल कर चलने,दिल खोलकर मिलने पर प्यार ही प्यार खुशी ही खुशी नजर आती है ।हां इसे पाने की कला जिसे नहीं आती उसे सिखाने से पीछे न हटें।
॰ अंत में यह भी याद रखें कि खुशी एक नन्ही सी चिड़िया हैं।क्षपट कर पकडना चाहेंगे तो तो वह उड जायेंगी प्यार से पुचकार कर निमंत्रण देंगी तो आकर आपकी हथेली पर बैठ जायेगी ।

मंजू ओमर
क्षांसी


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