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सेहत के साथ करें मेहनत

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Swati Sharma
27th Jun, 2020

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दोस्तों आज हम बड़े ही अहम् विषय पर बात करने जा रहे हैं जिसकी अहमियत जानता तो हर कोई है लेकिन उसके बाद भी उसे वो महत्व नहीं देते जो दिया जाना चहिये , फिर चाहे महिला वर्ग हो या पुरुष , बच्चे , युवा वर्ग कोई भी हो , सभी इस ओर कम ध्यान देते नज़र आ रहे हैं , लेकिन हा एक बुजुर्ग वर्ग है जो शायद अपनी स्वयं की  वर्तमान स्थिति के कारण इस बात को समझ पाते हैं की सेहत हमारे लिए कितना जरूरी है

हम कहते हैं “Health is wealth”, पर जीते ऐसे हैं मानो “Wealth is health”

अधिकतर लोग बिजली बिल / टेलीफोन बिल कब जमा करते हैं ….आखिरी दिन  पर … जब तक काम सर पर नही आ जाता हम उसे टालते रहते हैं …

और यही सेहत के साथ भी होता है ….. चूँकि अभी हमारी  सेहत अच्छी है इसलिए हमे इस और ध्यान देने की कोई जल्दी नहीं लगती , लगता है सब ठीक ही तो है , फिर अभी walk पे जाने की , jogging करने की क्या जल्दी है कुछ दिन बाद शुरू कर सकते हैं …
हम सोचते हैं बुरी चीजें दूसरों के साथ ही हो सकती हैं :

सेहत के मामले में हम अपना बुरा कभी नहीं सोचते …. हाँ और चीजों में खूब बुरा सोच लेते हैं पर सेहत के मामले में हम अलग हैं


हम सोचते हैं कि बाद में भी ध्यान दे दिया तो काम चल जायेगा

पर ऐसा नहीं है , पहली बात  तो ये  कि ये   “बाद ” जल्दी आता नहीं है ,
और दूसरा जिस वक़्त हम सेहत को अनदेखा करते जाते हैं उसी वक़्त हम   बीमारी को निमत्रण देते  जाते हैं . यानि हम खुद को समझा तो लेते हैं कि बाद में  कर लेंगे ,

पर जिस तरह स्कूल में शुरू से पढाई से जी चुराने वाला बच्चा  कभी अंत में पढ़ कर टॉप नहीं करता , उसी तरह कोई इंसान सालों तक अनदेखा करने के बाद अंत में ध्यान देने पर  सेहत नहीं पा सकता , इसलिए हमे आज से ही इस दिशामें ध्यान देना चाहिए .

आईये में आपको एक छोटी सी कहानी सुनाती हूँ :-

एक सेठ था ,वो दिन- रात व्यापार बढ़ाने में लगा रहता था , उसका लक्ष्य था कि उसे शहर का सबसे अमीर आदमी बनना है . धीरे -धीरे उसने ये पूरा भी कर लिया , इस कामयाबी की ख़ुशी में उसने एक शानदार घर बनवाया।
गृह प्रवेश के दिन उसने एक बहुत बड़ी पार्टी दी और जब सारे मेहमान चले गए तो वो अपने कमरे में सोने के लिए गया .
वो जैसे ही बिस्तर पर लेटा एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी ,
” मैं तुम्हारी आत्मा हूँ … और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!”
सेठ सकते में आ गया और बोला , ” अरे तुम ऐस नहीं कर सकती, तुम चली जाओगी तो मैं तो मर जाऊँगा …देखो मैंने कितनी बड़ी कामयाबी हांसिल की है… तुम्हारे लिए करोड़ों रूपये का घर भी बनवाया है … इतनी सुख -सुविधाएं तुम्हे कहीं नहीं मिलेंगी … यहाँ से मत जाओ …”

आत्मा बोली , ” मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था …. पर करोड़ों का घर बनवाने के चक्कर में तुमने इस अमूल्य शरीर का ही नाश कर डाला ,…तुम ठीक से चल नहीं पाते …ऱात को तुम्हे नींद नहीं आती … तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है …. तनाव की वजह से ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है तुम्हारा शरीर …… तुम ही बताओ क्या तुम ऐसे किसी घर में रहना चाहोगे जहाँ चारो तरफ गंदगी हो … जिसकी छत टपक रही हो …. जिसके खिड़की -दरवाजे टूटे हों …., नहीं चाहोगे ना !!! …. इसलिए मैं भी ऐसी जगह नहीं रह सकती ….”

और ऐसा कहते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल गयी …और सेठ की मृत्यु हो गयी .

ये कहानी बहुत से लोगों की हकीकत है … 😀👍

मैं ये नहीं कहती  कि आप अपने  लक्ष्य पूरे  मत करिये , पर मैं ये ज़रूर कहूंगी  कि जो भी करिये सेहत को सबसे ऊपर रखिये ….हमे खुदका और अपने परिवार का सेहत की ओर कर्तव्य समझना और समझाना है

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Swati Sharma

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