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मौन हूँ अन भिज्ञ नही

Laxmi Yadav
Laxmi Yadav
27th Jun, 2020

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मौन हूँ अन भिज्ञ नही

मैं काल चक्र हूँ,
जो बनता इतिहास हूँ,

सतयुग मे धर्म का देकर स्वप्न मे छलावा,
सत्य वादी हरीश चंद्र से शूद्र के यहाँ जल भरवाया,

द्वापर युग मे पाप धरती से ना सहा या,
अग्नि परीक्षा लेकर भी सिया को उर मे समाया,

त्रेता युग मे जब लगी द्रौपदी दाव पर,
मूक हुआ तब धर्म- गदा- गांडीव बस चला दाव चीर पर,

गंगा पुत्र भीष्म हूँ, धृतराष्ट्र नहीं,
मैं भले मौन रहा पर अन भिज्ञ नहीं,
क्योंकि मैं कालचक्र हूँ जो बनता इतिहास है,

कलियुग मे देख लिया निर्भया की ध्वस्त होती अस्मत,
सह लिया प्रियंका की जलती किस्मत,
पी लिया मैंने हलाहल अब तो छलके अमृत मधु कलश,

फिर भी मैं मौन रहा जिंदा रही बस इस युग मे भी क श म क श,

क्योंकि मैं कालचक्र हूँ जो बन ता इतिहास हूँ,

इसीलिए मौन हूँ पर अन भिज्ञ नहीं।

लक्ष्मी यादव
१४ मई २०२०

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