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बरसात

डॉ रेखा जैन
27th Jun, 2020

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पावस रुत मनभावनी,रिमझिम बरसे मेह
हिलमिल झूला झूलती ,लुटा रही है नेह।

सखियाँ झूला झूलतीं,बाँट रही हैं नेह,
क्यों सावन के माह में,पिया न आये गेह

मॅहदी रची हथेलियां,पूछे बारम्बार
क्या सावन के माह में,पिया मिलेंगे द्वार।


डॉ रेखा जैन
शिकोहाबाद

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डॉ रेखा जैन

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