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चुनाव

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Praphull chandra mathpal
27th Jun, 2020

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मैं मीठा-मीठा बोल रहा वह भाव खा गए,
क्या करूं जी अब मैं चुनाव आ गए।
गली-गली घूम रहा पसीना बहा के,
वह बोले बैठो जी बैठो आया नहा के।
मन ही मन में हम भी जी ताव खा गए,
क्या करूं जी अब मैं चुनाव आ गए।
मैं मीठा- मीठा बोल रहा व भाव खा गए,
क्या करूं जी अब मैं चुनाव आ गए।
जिनको कभी देखा नहीं फूटी आंख से,
उनके लिए कपड़ा हटाया नाक से।
वह बोल रहे हैं देखो जी बिलाव आ गए, क्या करूं जी अब मैं चुनाव आ गए। मैं मीठा- मीठा बोल रहा व भाव खा गए।
क्या करूं जी अब मैं चुनाव आ गए...
( प्रफुल्ल चंद्र मठपाल)

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Praphull chandra mathpal

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