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राज जुबान के

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Rakesh Berwal
26th Jun, 2020

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चुप रह जाऊं तो कयामत आ जाए, अब तो जुबान राज कुछ ऐसे खोलने लगी!
जो बने फिरते थे वह स्कूलों के पक्के कभी ,
इस मुकाम पर उनकी भी नियत डोलने ने लगी! जब पड़ा एक छापा उन शरीफ घरानों पर,
इस मुकाम पर उनकी भी नियत डोलने ने लगी! जब पड़ा एक छापा उन शरीफ घरानों पर,
उनकी ही कमाई उनके खिलाफ बोलने लगी !होता गया पलड़ा भारी उनके किए गुनाहों का, ईमान की तराजू जब उनके कारनामों को तोलने लगी जब तक दूसरों पर थी तो खूब मजा लिया,
बात जब खुद पर आई तो खून की गर्मी खोलने लगी एक चिंगारी सी है राकेश की बातों में ,
लगता है अच्छे अच्छों के जिगर को खोलने लगी!

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Rakesh Berwal

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