Bluepad‘कोरोना’ की गलत दवा ना बन जाए ‘जानलेवा’
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‘कोरोना’ की गलत दवा ना बन जाए ‘जानलेवा’

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Ananth A.
1st May, 2020

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‘कोरोना’ वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है। भारत क्या पूरा विश्व इस महामारी की गिरफ्त में आ चुका है। इस वायरस से मरनेवालों की संख्या दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। दुनिया में लगभग लाखों लोग इससे संक्रमित हैं। वहीं लगभग मरनेवालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। सभी देश अपनी तरफ से इस वायरस से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि किसी भी देश ने अभी तक औपचारिक रूप से कोरोना की दवा या वैक्सीन बनाने की सफलता पर कोई जानकारी नहीं दी है। वैसे स्थिति में कोरोना से लड़ना ‘अंधेरे में तीर मारने जैसा’ है।

मीडिया में आई खबरों के अनुसार डाॅक्टर कोरोना के लक्षणों को देखकर इसकी दवा कर रहे हैं। हरेक लक्षण के लिए अलग-अलग दवा का उपयोग किया जा रहा है। जैसे- बुखार, सर्दी-खांसी, बदन दर्द, सांस लेने में तकलीफ इत्यादि। डाॅक्टर इन लक्षणों को देखकर दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। इन दवाओं की मात्रा क्या होगी यह एक डाॅक्टर हीं अच्छे तरीके से समझ सकता है। ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि जब ये लक्षण सीजनल फ्लू जैसा है तो इसका उपचार तो घर पर भी किया जा सकता है। जैसे- पहले बुखार होने पर घर पर ही दवा लेने पर ठीक हो जाया करता था। वैसे ही सर्दी के लिए कफ सीरफ ले लिया जाता था। परंतु शायद उन लोगों को यह पता नहीं है कि जब यह बीमारी इतनी छोटी होती तो विश्व में इसको लेकर इतना हाहाकार क्यों मचता। क्यों देश की अर्थव्यवस्था खराब होने की नौबत आती? क्यों विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना को महामारी घोषित करता ? गलत तर्क देनेवाले लोग ‘नीम हकीम खतरे जान’ बन गए हैं।

अगर कोरोना को लेकर कोई गलत दवा दी गई तो इसका असर कितना गलत हो यह कोई नहीं जानता। कोरोना पाॅजिटिव होने पर डाक्टर का मरीज के पास रहना आवश्यक है। एक जानकार डाॅक्टर हीं ‘कोरोना’ को मात देने में मरीज की मदद कर सकता है ना कि एक सामान्य व्यक्ति की सामान्य सी समझ। कोरोना पीड़ित मरीज को अगर बिना जानकारी के कोई दवा दी गई तो संभव है कि इसका बुरा परिणाम पड़े। उस स्थिति में व्यक्ति की जिंदगी रह पाती है या नहीं इसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती।

‘कोरोना’ को लेकर किए गए रिसर्च के मुताबिक प्रतिदिन कुछ ना कुछ नए खुलासे हो रहे हैं। कभी यह खुलासे कोरोना के कारणों को लेकर होती है तो कभी उपचार के लिए उपयोग किए जा रहे दवाओं को लेकर। लेकिन अभी तक किसी भी देश ने ‘कोरोना’ को लेकर पुख्ता रूप से किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। प्रत्येक देश अपने तर्क दे रहे हैं। जब तक कोरोना की कोई दवा या वैक्सीन नहीं बन जाती इन तर्कों को मानने के अलावा कोई उपाय नहीं है।

विकसित से लेकर विकासशील देश के डाॅक्टर, वैज्ञानिक ‘कोरोना’ जैसे काल का काट तलाशने में लगे हुए हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि हम अपने समझ का गलत उपयोग कर किसी कोरोना पीड़ित को गलत दवा देने का प्रयास न करे। अगर कोई शंका होती है तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। इससे कोरोना पीड़ित के ठीक होने की संभावना अधिक है। लेकिन हम इसमें सहयोग अवश्य कर सकते हैं। हम जागरूकता फैला कर इससे बचाव के तरीके बता सकते हैं।


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Ananth A.

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