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मन से जीवन का रिश्ता

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Swati Sharma
26th Jun, 2020

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मन का हमारी जीवन में कितना असर होता है मन की शक्ति को समझ कर हम उसे नियंत्रित करके अपने जीवन को मनचाहे रूप में जी सकते हैं …जी हाँ मेरा मतलब ये है की मन और शरीर दोनों का सामंजस्य बनाना बहुत जरूरी है
मन आज खुश है तो " बच्चा लाख शैतानी कर ले उस पर प्यार ही आयेगा" , बड़े नाराज़ भी होंगे तो भी उनके गले ही लग जायेंगे और प्यार से सॉरी बोल देंगे , गलती की भी थी या नहीं इससे फर्क भी नहीं पढ़ेगा …… और जिस दिन मन खराब है ….फिर तो पूछिए ही मत एक गिलास भी गिर गया न तो ऐसा गुस्सा आएगा जैसे पूरा स्टैंड ही गिर पढ़ा हो …चीखते हुए खुद पर ही झल्ला जाते है आप ……
तो जब इस मन के पास इतना पॉवर है तो क्यों न इसके साथ थोडा दोस्ती की जाये , इसे पटाया जाये , बहलाया जाये
हाँ हाँ क्यों नही भाई , हम तो इंसान हैं चाहें तो बड़ो बड़ो को मना सकते हैं फिर ये मन ये तो बच्चा ही होता है न , वो भी हमारा अपना बच्चा , इसे मनाना क्या बड़ी बात है …………..है न सही बात

लेकिन जो ये इतना आसान ही है तो फिर क्यों हर कोई इसे नियंत्रण में नहीं कर पाता ,
तो आईये जानते है इसे कैसे मनाया जाये ………..देखिये जैसे छोटा बच्चा घर में किसी ना किसी से डरता ही है , उसी प्रकार आपका मन भी आपकी एक पॉवर के आगे हार मान जाता है वह है आपकी इनर पॉवर –
मन के हारे हार है मन के जीते जीत , मन को जीत दिलाना मतलब सोचना कम और करना ज्यादा है , हर वो काम जो आपको ख़ुशी दे वो सब करिए , खुद को बस वहा रोकियेगा जहाँ आपके कारन किसी और का नुक्सान हो रहा हो.
जीवन को सिर्फ जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए नहीं जीना है बल्कि जीना ऐसे है जैसे सब जिम्मेदारियां भी और जीवन का हर एक पल , आपके मन की एक एक इक्षा को पूरा कर रहे हैं अपनी इनर पॉवर को मजबूत करिए , इससे मन मजबूत होगा और जीवन खुशनुमा बनेगा .
मन से दोस्ती करने के कुछ टिप्स –
सबसे पहला काम, जो आपको करना है वो है “अपने मन को समझना ।” खुद को मन से अलग करना । जब तक आप आत्मा और मन, भावना और इच्छा में भेद नहीं कर लेते, आप अपने मन को काबू में नहीं कर सकते
अब खुद पर विश्वास कीजिए … बार बार ये समझाईए कि तुम कर सकते हो
इन सब बातों के साथ साथ बहुत ज्यादा उत्तेजित नही होना खुद को शांत रखना है … क्योकिं आप जब किसी बात पर कंट्रोल करेंगें तो मन विरोध करेगा … फिर झुंझलाहट होगी …
खुद को व्यस्त रखें। इससे आप फालतू का नहीं सोचेंगे मन कार्य में लगा रहेगा।
आशावादी बनें.. और आप कर सकेंगें और इस बातों का आपको एक फायदा ये होगा कि आपके आसपास के लोग भी आपकी मिसाल देना शुरु कर देंगें …
मैं ये नहीं कह रही हूँ कि आप अपने मन की सुनना ही बंद कर , नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है , बस पहले मन को समझिये , फिर उसे समझाईए , फिर देखिये आपका मन और जीवन एक सी राह कैसे पकड़ते है तो आज से ही शुरू करिए मन के साथ मेलजोल बढ़ाना –
अब ये मत बोलिएगा कि आज मन नही कर रहा … कल से शुरु करते हैं …
जो है सब आज ही है😀

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Swati Sharma

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