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प्रकृति

Umesh Shukla
Umesh Shukla
25th Jun, 2020

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प्रकृति पर नहीं चल सकी
कभी किसी की मनमानी

जिसने इसे ठुकराना चाहा
है उसे पड़ी मुंह की खानी

एक नहीं कई बार प्रकृति ने
मानव को औकात बताई है

कभी तूफां. कभी जल प्रलय
कभी सूखे से तबाही मचाई है

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Umesh Shukla
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