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#धैर्य

Anita pathak
Anita pathak
24th Jun, 2020

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सरहद पर खड़ा सिपाही
कहता है अपने पिता से
धैर्य रखो
आऊँगा मैं
टूटी छत ठीक करवाऊँगा मैं।

वो कहता है अपनी माँ से
धैर्य रखो आऊँगा मैं
तेरे हाथ से
रोटी खाऊँगा मैं।

वो कहता अपनी पत्नी से
धैर्य रखो मैं लौटूँगा
फिर प्रेम के
गीत सुनाऊँगा।

वो कहता अपने बच्चों से
धैर्य रखो मैं आऊँगा
सारे खेल - खिलौने
सब दिलाऊँगा।

वो कहता अपने यारों से
धैर्य रखो मैं आऊँगा
फिर वही
कहकहे लगाऊँगा।

वो कहता अपने गाँव से
धैर्य रखो मैं आऊँगा
अबकी बार
होली ना छोड़ुँगा।

आया वो एक दिन
वादा उसने निभाया था
पर वो सच्चा सपूत
कफ़न ओढ़कर आया था

जाते - जाते भी वो
कह गया अपनी धरती माँ से
धैर्य रखो मैं आऊँगा
मिट्टी का कर्ज़ चुकाऊँगा

तोड़ चला सब वादे - इरादे
देखो तुम सब दुख ना करना
धैर्य रखो मैं आऊँगा
भारत माँ का ही सपूत कहलाऊँगा।

( स्वरचित मौलिक अधिकार सुरक्षित )
अनिता पाठक
22-06-2020

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