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यह पन्ना सबके जीवन में खुलता है ।

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
23rd Jun, 2020

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वद्धा वस्था उस अवस्था को कहते हैं जब मानव का जीवन समाप्त होने के समीप होता है ।मन में ऐसे विचार आने लगते हैं कि अब जीवन का कोई भरोसा नहीं है ।सांस कब साथ छोड़ देगी पता नहीं ।वद्ध लोगों को कयी तरह के शारीरिक और मानसिक रोग लगने की आशंका होने लगती है ।वद्धा वस्था धीरे धीरे आने वाली अवस्था है जो कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है । लेकिन दुखद है कि वे आज कल अपने को बहुत अकेला महसूस कर रहे हैं । रोजी-रोटी की तलाश में घर बार छोड़ कर बच्चे शहर से दूर या विदेश में जा बसे हैं ।जो उनकी आवश्यकता भी है और मजबूरी भी । उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरी की चाह बच्चों को माता पिता से दूर कर रही है । युवा बेहतर की तलाश में घर से बाहर चले जाते हैं । फिर वहां से आना नहीं चाहते । अपनी ही जीवनशैली में मस्त हो जातें हैं । धीरे धीरे घर से उनका लगाव कम होने लगता है ।आज संवेदनशीलता का स्तर भी घटता जा रहा है ।वद्ध माता-पिता के गुज़र जाने पर संतानों में जिम्मेदारी से मुक्त होने का भाव भी दीखता है । बच्चे वद्ध माता-पिता को बाहर से कुछ पैसे भिजवा कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री समझ लेते हैं । बच्चों को तलाशती बुजुर्ग माता-पिता की की आंखें और प्यार के दो बोल सुनने को उनके कान बस तरसते ही रह जाते हैं । अनुभव और संस्कारों से भरे हमारे बुजुर्ग अपनों के नजदीकी के लिए तरसते रहते हैं ।

में भी उनकी कोई रूचि नहीं होती । पूछने पर कहते हैं कि आपूछने पश्र कहते हे कि आपको क्या करना ।आप तो बस चुपचाप खाओ पियो और पड़े रहो । अजनबी की तरह पड़े रहना किसे अच्छा लगता है । यही वजह है कि आजकल बहुत से बुजुर्ग अपने बच्चों के साथ नहीं रहना चाहते । इससे अच्छा वे अपने घर अपने शहर में रहना ज्यादा पसंद करते हैं जहां कुछ लोग तो होते है जान-पहचान के । जिनसे बात करके उनका मन बहलाया लिए जाता है ।आज बुजुर्ग बहुत अकेला महसूस कर रहे हैं अगर जीवन साथी जिंदा है तो ठीक लेकिन यदि दोनों में से किसी एक के न रहने पर स्थिति और भी बद्तर हो जाती है
बुजुर्गो के प्रति युवाओं की उदासीनता का एक नजारा अक्सर बसों मेट्रो स्टेशन पर देखने को मिलता है बहुत से युवा उन्हें बैठने की जगह नहीं देते और उन्हें उपेक्षित कर देते हैं । बुजुर्गो की तकलीफ़ की एक बड़ी वज़ह युवाओं का उनके प्रति उदासीनता और कठोर रवैया भी है मगर उन्हें भी अब इन सबके बीच में जीने की आदपड गई है ।आप अकेले है बेसहारा है तो मजबूरन आपको बच्चों के पास ही रहना पड़ेगा ।वे अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर आपके पास नहीं आ सकते जैसा उनका कहना है तों आपको ही उसके पास जाना पड़ेगा ।जो सक्षम है जिनके पास कोई सहारा है वे तो है सकते हैं अपने हिसाब से । लेकिन जिनकी देखरेख के लिए कोई नहीं है वे मजबूर हैं अपने घरों को छोड़ने के लिए ।ऐसे में उन्हें बच्चों का हर तरह का व्यवहार सहना ही पड़ेगा । जिंदगी की भर्ती शाम में थकती काया और कम होती क्षमताओं के बीच हमारी बुजुर्ग पीढ़ी का सबसे योग असुरक्षा और अकेलापन है । युवा यह भूल जाते हैं कि वद्धा वस्था जीवन की किताब का वह पन्ना है जो सबके जीवन में खुलना है । इसलिए बुजुर्ग की बच्ची खुची जिंदगी उन्हें प्यार और छोटी छोटी चीज़ों के लिए न तरसाये न । उन्हें ढेर सारी अपनापन देओल उनकी अच्छे से देखभाल करें ।यह तो आपका सौभाग्य है कि उनका आशीर्वाद भरा हाथ आप पर बना हुआ है आपकी ये अच्छी किस्मत है कि वे आपके साथ है जो हमेशा आपके खुशोयो की दुआं करते हैं


मंजु ओमर क्षांसी पीढ़ी की जीवन शैली बहुत तेज होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपने पसंदीदा कामों के लिए तो वक्त निकाल ही लेते हैं न इसलिए यहां यह कहना सही नहीं होगा कि उनके पास वक्त नहीं है । दरअसल श्री पीढ़ी आत्मकेंद्रित होती जा रही है ।वह पुरानी पीढ़ी की बात सुनना पसंद नहीं करते ।और नहीं कोई राय सलाह लेना चाहते हैं । यहां तक कि कोई अपनी बात बताने


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