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मनुष्य जीवन और हम

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Swati Sharma
23rd Jun, 2020

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एक मनुष्य अपने जीवन में 4 अवस्थाओं से गुजरता है, जिनके नाम हैं

  • बालावस्था,
  • किशोरावस्था,
  • युवावस्था, एवं
  • वृद्धावस्था।

इन चारों अवस्थाओं में मनुष्य कुछ न कुछ सीखता है और कई गुणों एवं दोषों को अपनाता है।
इन सब अवस्थाओं में ग्रहण किये गए ज्ञान तथा गुण औपचारिक होते हैं। ये सब किताबों या विभिन्न लोगों  द्वारा सिखाये जाते हैं।
इनमे से कुछ गुण समाज में रहने से, बड़ों तथा छोटों से बात करने से मिलते हैं। कुछ गुण अपने मित्र तथा सहकर्मी की संगति में रहने से मिलते हैं। तथा कुछ गुण मनुष्य को अपने अनुभव  से मिलते हैं।
जहाँ पर मनुष्य इतने गुणों को ग्रहण करता है, वहीँ वह दोषों  को भी ग्रहण करता है।हर मनुष्य के अंदर गुण और दोष होते हैं और यह उसी पर निर्भर करता है की वह किन गुणों और दोषों को ग्रहण करना चाहता है। वैसे तो मनुष्य को सभी प्रकार के गुणों का स्वीकारना चाहिए तथा सभी प्रकार के दोषों को अस्वीकार करना चाहिए। परन्तु ऐसा कर पाना बहुत ही मुश्किल है।
फिर भी मनुष्य जीवन में हमें कुछ गुणों को अवश्य अपनाना चाहिए  :-

आदर करना:

कोई भी मनुष्य, चाहे वह आपका भाई हो, मित्र हो, बहन हो, माता-पिता हों, शिक्षक हो, अथवा वह आप से अधिक प्रतिभाशाली हो या कम प्रतिभाशाली हो, चाहे वह आपसे गरीब हो या अमीर, सदैव अपने से सामने वाले का आदर करें। कभी भी किसी को निचा न दिखाएं। दूसरों के प्रति सम्मान तथा प्रेम की भावना रखना उचित होता है। इससे दूसरे व्यक्ति भी आपका सम्मान एवं आपसे प्रेम करते हैं।


अपनी गलती स्वीकार करना:

कोई भी इंसान पूर्ण गुणवान और हमेशा सही नहीं होता है। हर मनुष्य कभी न कभी कोई गलती कर बैठता है। यदि आप से भी गलती हुई है तो उसे छुपाने की बजाये उसे स्वीकार कर लें तथा उसे सुधारने की कोशिश करें। इससे आप पर लोगों का भरोसा बना रहता है तथा एक अच्छी छबि  बनती है। साथ ही ऐसा करने से लोग आपको दोबारा मौका भी देते हैं।



परोपकार

एक मनुष्य को परोपकारी होना चाहिए। यदि आप से कभी कोई सहायता  मांगने आता है और आप वह सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं तो आपको सहायता अवश्य करनी चाहिए। किसी भी मनुष्य की सहायता करने से, चाहे वह धन के रूप में हो, चाहे परिश्रम के रूप में अथवा मानसिक रूप से  साथ खड़े होने के रूप में, समाज में आपकी और उस व्यक्ति का दोनों का आतंरिक विकास बढ़ता है । इसके अतिरिक्त लोग आपका सम्मान  भी करते हैं।



वाणी पर नियंत्रण
एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से बात करनी चाहिए तथा उसका हाल चाल पूछना चाहिए। परन्तु लगातार बोलना तथा बोलते वक़्त अपनी सीमा लांघना किसी भी मनुष्य के लिए अच्छा गुण नहीं है। मनुष्य को समय  और परिस्थिति  देखकर ही बात करनी चाहिए अन्यथा उसके शब्द दूसरे व्यक्तियों को परेशान कर सकते हैं।क्या बोलने वाले हैं इसके  साथ साथ किस  तरह बोलना है इस बात का ज्ञान मनुष्य को होना जरूरी है।



उद्देश्य पूर्ण जीवन
हर इंसान का जीवन जीने के लिए कोई न कोई उचित उद्देश्य होना ही चाहिए , जो उसे जीवन में एक राह और दिशा प्रदान करे।  बिना उद्देश्य का जीवन उस  पतंग के समान  होता है जिसकी डोर किसी के भी हाँथ  होती है अर्थात जिसे कभी भी भटकाया या काटा जा सकता है , अर्थात अपना एक लक्ष्य बने और उसके प्राप्ति होती प्रयास करें।



मनुष्य  जीवन में हमें इन बातों को अवश्य अपनाना चाहिए साथ ही ध्यान रखना चाहिए की हमारे कारण किसी भी व्यक्ति या जीव का कोई भी अहित न हो।  ईश्वर की इस मनुष्य रूपी धरोहर को सही कामो में लगाकर अपना और दुसरो का कल्याण करना ही मनुष्य जीवन का अंतिम उद्देश्य होना चाहिए।

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