Bluepad हां...मैं लिखने लगी हूं
Bluepad

हां...मैं लिखने लगी हूं

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
22nd Jun, 2020

Share


जिंदगी की ढलती सांझ में ,
थोड़ा जज्बाती होने लगी हूं ,
जाते वक्त से कुछ पल चुराकर ,
अब थोड़ा ...खुद से मिलने लगी हूं ।
खुद से मिलने की चाहत में ,
जब ... खुद के अंदर झांका था ,
शब्दों के बेतरतीब समंदर का ,
अंदर .....बेहद शोर पाया था ।

ये शब्द थे.......
बेरंग हुए जज़्बातों के, जिन्हें रंग नहीं मिल पाया था ,
दिल की कुछ चाहतों के.....जिन्हे आज भी अधूरी पाया था,
कुछ अधूरे ख्बाबों के ,जो हकीकत नहीं बन पाए थे ,
और थे अनकहे एहसास ...जो व्यक्त नहीं हो पाए थे ,
और साथ थे कुछ अनुभव , जो वक्त ने हमें सिखाए थे ।
कुछ नम शब्दों ने...... पलकों में घर बनाया था ,
साथ सभी के.... कुछ खुशियों ने भी अपना डेरा डाला था ।


उलझे उलझे इन शब्दों से,जाने क्यूं मैं खेल रही हूं ,
यादों की इस गठरी को , धीरे धीरे खोल रही हूं ,
जिंदगी के कुछ पन्नों को, कागज पर उकेर रही हूं ,
इन शब्दों में सामंजस्य बना कर....
हां ....मैं थोडा़ बहुत लिख रही हूं ।।।

7 

Share


Bhawna Nagaria
Written by
Bhawna Nagaria

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad